
काला सोना परवान पर और गेहूं ने जगाई बम्पर पैदावार की उम्मीदें
उदयपुर/ कानोड़. फाल्गुनी बयार के साथ इस बार जहां काला सोना परवान पर है, वहीं गेहूं की बालियों ने किसानो को बम्पर पैदावार की उम्मीदें जगाई है। गेहूं की फसल ने स्वर्णिम रंग ओढऩा शुरू कर दिया है, तो कही खेतों में फसल की कटाई शुरू हो चुकी है । इस बार धरती पुत्र ज्यादा ही खुश है क्योंकि भरपूर बारिश के बाद पानी की कमी नहीं रहने से फसल पर कोई रोग नही पनपा और न ही मौसम के बदलने वाले मिजाज ने उन्हें ज्यादा परेशान किया। हालांकि पिछले दिनों हुई बफ की परतों ने नुकसान पहुंचाया, लेकिन शेष फसलो को लाभ भी हुआ है । लम्बी सर्द रातों के बीच मावठ की चादर रहने से नमी बनी रही। ज्यादा पाला नही पडऩे, कीट बीमारियों का प्रकोप नही होने से गेहूं सहित अन्य फसलों की रिकार्ड पैदावार होने की संभावना बनी हुई है । वल्लभनगर क्षेत्र में इस बार नहरी क्षेत्र रुण्डेड़ा, नवानिया, तारावट आदि में सिंचाई नहीं होने से किसानों को बुवाई से वंचित रहना पड़ा है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बडग़ांव, सलूम्बर, गिर्वा के सभी गांवों में गेहूं का उत्पादन उम्मीद से भी अधिक तय माना जा रहा है । सहायक कृषि अधिकारियों के अनुसार गत वर्ष प्रति बीघा छह से साढ़े छह क्विंटल के मुकाबले इस बार आठ क्विंटल से भी अधिक पैदावार रहने के आसार बने हुए हैं ।
इस बार भी अफीम की फसल को लेकर किसान खुश है कि औसत के अनुसार फसल की लुवाई कर सकेंगे। मुखिया की रिपोर्ट के अनुसार अफीम किसान को इस बार उसकी मेहनत का पूरा लाभ मिलेगा । क्षेत्र के कुछ खेतों पर मामूली रोग व मावठ ने नुकसान पहुंचाया, लेकिन इसके बाद मौसम ने पूरा साथ दिया। पूर्व सरपंच व किसान नेता किशनलाल जाट ने बताया कि कृषि विभाग के सहयोग व सलाह से दवाओं का छिड़काव कारगर साबित हो रहा है । सहायक कृषि अधिकारी ओमप्रकाश चौबीसा ने बताया कि इस बार गेहूं के साथ ही सरसों की बम्पर पैदावार होगी । सरसों की फसल बीते कुछ वर्षों से इस बार अच्छी देखी जा रही है ।
वल्लभनगर क्षेत्र में कहा कितनी फसल, आकड़ों पर एक नजर
वल्लभनगर क्षेत्र में रबी की बुवाई 2017 में 25 हजार 500 हैक्टेयर थी, जो वर्ष 2018 में बढ़कर 27 हजार 390 हैक्टेयर जा पहुंची, लेकिन इस बार पानी की कमी के चलते यह आंकड़ा 21789 हैक्टेयर तक सीमित रह गया। गत वर्ष से इस बार 6009 हैक्टेयर पर बुवाई कम हुई। इस बार गेहूं- 11450 , जौ-1575 , सरसो-2960, तारामीरा-29 , इशबगोल-2465 , सुआ-अजवाईन-240 , अलसी-2, मेथी-120 , कलोंजी-65 , हराचारा-395 व सब्जी-210 हैक्टेयर में बोई गई है । अफीम की फसल गत वर्ष 200 हैक्टेयर से घटकर इस बार 150 हैक्टेयर हुई है। किसानों का रुझाान इस बार चने की फसल की ओर बढ़ा। चना गत वर्ष 550 हैक्टेयर पर बोया गया। इस बार 1950 हैक्टेयर पर बोया गया है। वहीं सरसो की फसल में भी 2540 हैक्टेयर का इजाफा हुआ। 29 हैक्टेयर में बोई जाने वाली तारामीरा की फसल इस बार 427 हैक्टेयर बोई गई है ।
इनका कहना है
गेहूं व सरसों की फसल की बम्पर पैदावार की उम्मीद है। गत दिनों मावठ व बर्फबारी से अफीम की फसल को कुछ नुकसान हुआ है। मौसम का साथ रहा तो किसान औसत पूरी कर लेगा लेकिन कई खेतों में डोडे खराब होने से किसानों को चिंता सता रही है । सरकार औसत व गाढ़ता में किसानों को रियायत दें जिससे किसानों के पट्टे सुरक्षित रह सके ।
उदयलाल जाट, सरपंच व किसान सारंगपुरा
इस बार फसल बुवाई का आंकड़ा घटा है। पानी की कमी है। नहरी क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो पाई। एक बार हल्की मावठ को छोड़ बाकी मौसम के साथ देने से फसल रोगग्रस्त नहीं हुई। मावठ से चने को नुकसान हुआ है। क्षेत्र में अफीम, गेहूं ,सरसों की बम्पर पैदावार की उम्मीद है । क्षेत्र में गेहूं से मुंह मोड़ किसान ने चने की बुवाई को प्रमुखता दी है । दुधिया गेहूं में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करने व अफीम पर अनावश्यक दवाओं का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी जा रही है ।
मदन सिंह शक्तावत, कृषि अधिकारी, भीण्डर
Published on:
22 Feb 2019 12:29 am
