
आदिवासी अंचल में जनजाति बच्चों की उपेक्षा, खुले में पढ़ा रही है सरकार
उदयपुर/ पारसोला. government school आदिवासी बाहुल्य प्रतापगढ़ जिले के पारसोला क्षेत्र स्थित भरकुंडी राउमावि में आदिवासी स्कूली बच्चों के भविष्य से 'खेल हो रहा है। शिक्षा अध्ययन के नाम पर बच्चों को खुले बरामदे में बिठाया जा रहा
हैं। क्षेत्र स्थित राजकीय स्कूलों में परेशान विद्यार्थियों का संकट केवल पारसोला का नहीं है। बल्कि बहुतायत में ऐसे स्कूल हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिकता के नाम पर दरी पट्टी तक नसीब नहीं होती। ग्रामीण स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के मामले में शिक्षा विभाग ही दोषी नहीं बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी हैं, जो समाज से जुड़े होने के बाद भी बच्चों की परेशानी को लेकर गंभीर नहीं हैं।
खामियां ऐसी भी
भरकुंडी राउमावि का भवन जर्जर है। आठ कमरों में से एक प्रधानाचार्य, परीक्षा, पुस्तकालय व कम्प्यूटर रूम है। बाकी छोटे -छोटे सात कक्षाकक्ष एवं खुले बरामदे में सर्दी, गर्मी एंव बरसात के मौसम में पहली से बाहरवीं तक करीब ५सौ विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। कक्षाकक्षों की कमी के बीच एक वर्ष पूर्व आए कम्प्यूटर धूल फांक रहे हैं। पुराने कवेलूपॉश कक्ष में पोषाहार पकाया जाता है। सरपंच खेतसिंह मीणा की ओर से ग्राम पंचायत प्रशासन की ओर से नए भवन निर्माण को लेकर पांच बीघा जमीन व खेल मैदान के लिए जमीन उपलब्ध करा रखी है। पिछली सरकार ने रमसा के तहत वर्ष २०१६-१७ मे छह कक्षाकक्ष की स्वीकृति दी थी। इसके बाद ठेकेदार कार्य को अधूरा छोड़कर चला गया। तबसे इसका कोई धणीधोरी नहीं है।
स्वीकृत हैं २1 पद
स्थानीय विद्यालय में प्रधानाचार्य के साथ कुल २१ पद स्वीकृत हैं। इसमें से दो द्वितीय ग्रेड शिक्षक हिन्दी व गणित, एक पद राजनीति विज्ञान व्याख्याता, पुस्तकालय प्रभारी, एलडीसी एंव एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद रिक्त है। ऐसे में शैक्षणिक कार्य बाधित है। स्थानीय बच्चों के अलावा उनके अभिभावकों का आरोप है कि जून में ज्वाइन करने वाले संस्थाप्रधान आए दिन गायब रहते हैं। इससे भी शैक्षणिक कार्य बाधित हो रहा है।
जुटाता हूं जानकारी
मैं अभी बाहर हूं। अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी राममोहन मीणा को विद्यालय भेजकर जानकारी जुटाता हूं।
शांतिलाल जैन, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रतापगढ़
Published on:
26 Sept 2019 06:00 am
