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अनाथों को पालने वाला डूब रहा कर्ज में

ORPHAN: आदिवासी क्षेत्र के शेल्टर होम को ढाई वर्ष से भुगतान नहीं, करीब ढाई वर्ष के 65 लाख रुपए बकाया
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अनाथों को पालने वाला डूब रहा कर्ज में

अनाथों को पालने वाला डूब रहा कर्ज में

झाड़ोल . आदिवासी बहुल उपखण्ड क्षेत्र में आेगणा के आश्रय स्थल को संचालित करने वाली संस्था लविना विकास संस्थान को ढाई वर्ष के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। एेसे में संचालक संस्था ऋण लेकर अनाथ बच्चों का पालन पोषण कर रही है। सरकार के जिम्मेदारों द्वारा संस्थान को भुगतान नही किया जा रहा हैं।

सहायक निदेशक कार्यालय, बाल अधिकारिता विभाग उदयपुर के अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद 21 सितम्बर 2017 केा ओगणा में आश्रय स्थल खोलने की स्वीकृति जारी की थी। संस्थान ने अनुदान के लिए 29 नवम्बर 2017 को वर्ष 2017-18 का वित्तीय प्रस्ताव कार्यालय को भेज दिया लेकिन संस्थान को अब तक भुगतान नहीं मिला। संस्थान ने अनुदान के लिए 26 अपे्रल 2018 को वर्ष 2018-19 का वित्तीय प्रस्ताव एवं 26 अपे्रल 2019 को वर्ष 2019-20 का वित्तीय प्रस्ताव निदेशक एंव संयुक्त शासन सचिव, बाल अधिकारिता विभाग को भेज दिया था।

राज्य सरकार ने आश्रय स्थल, ओगणा को 25 बालकों की स्वीकृति 21 सितम्बर 2017 को जारी की लेकिन वर्तमान में 30 बालक रह रहे हैं। सरकार की ओर से आश्रय स्थल को पहले वर्ष 25 लाख रुपए दिए जाते हैं जिसमें 20 लाख रुपए आश्रय स्थल का वार्षिक किराया, स्टाफ खर्च, राशन, लाइट, पानी समेत विभिन्न प्रकार के खर्च के लिए एवं 5 लाख रुपए बालकों के सोने के लिए पलंग,स्टेशनरी समेत विभिन्न प्रकार की सामग्री खरीदने के लिए होते हैं। इसके बाद हर वर्ष 20-20 लाख रुपए दिए जाते हैं। इस हिसाब से लविना विकास संस्थान का ढाई वर्ष के करीब 65 लाख रुपए का अनुदान बाकी है।

बाजार से उधार, गाड़ी पर ऋण लेकर पाल रहे
पूर्व में भुगतान नहीं होने पर संस्थान ने बाजार से ऋण लेकर आश्रय स्थल का संचालन किया। एक वर्ष के बाद भी भुगतान नहीं होने पर निदेशक ने अपने चारपहिया वाहन पर ऋण एवं रिश्तेदारों व परिचतों से उधार लेकर अनाथों को पालन किया। निदेशक ने संासद अर्जुनलाल मीणा को स्थिति से अवगत करवाया। सांसद ने मुख्यालय को पत्र लिखा लेकिन आज तक भुगतान नहीं हो पाया।

अधिकारी बोले नहीं मिला प्रस्ताव
निदेशक ने 24 सितम्बर 2019 को विभाग में शिकायत दर्ज करवाई। इस पर सहायक निदेशक मीना शर्मा ने 4 अक्टूबर को जवाब दिया कि अनुदान के लिए हर वर्ष नियमित अनुशंसा की जा रही है। जयपुर के अधिकारियों ने 8 नवम्बर 2019 को बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में लविना विकास सेवा संस्थान से आश्रय स्थल के लिए अनुदान का वित्तीय प्रस्ताव नहीं मिला। संस्थान ने बकाया भुगतान के लिए जिला एवं राज्य स्तर के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ ही प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा।

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अधिकारी कह रहे हैं कि सक्षम हो तो चलाओ शेल्टर होम नहीं अन्यथा बन्द कर दो। दो वर्ष तक मैंने ब्याज पर रकम उधार लाकर आश्रय स्थल चलाया। राज्य सरकार में जो भुगतान बाकी है, वह तो मुझे मिलना ही चाहिए।

भरत पूर्बिया निदेशक, लविना विकास संस्थान, ओगणा

आज तो छुटïटी है। मुझे क्या पता कि किस संस्थान का कितने समय से कितना भुगतान बाकी है। अगर ऐसी समस्या है तो मैं सोमवार को कार्यालय जाकर दिखवाती हूं।
वीणा प्रधान, निदेशक बाल अधिकारिता विभाग