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मच्छरों के डंक से सहमा चिकित्सा विभाग…डेंगू के 33 केस आए सामने

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मच्छरों के डंक से सहमा चिकित्सा विभाग... डेंगू के 33 केस आए सामने

भुवनेश पंड्या/उदयपुर . भले ही गत वर्षों की तुलना में मच्छरों ने इस बार आतंक कम फैलाया हो, लेकिन मलेरिया का आंकड़ा एक हजार के पास आ गया है। खास बात यह है कि तमाम उपायों के बावजूद चिकित्सा विभाग मलेरिया पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रहा है। हालत इतने खराब हैं कि विभाग यह तक नहीं बता पा रहा है कि मलेरिया की रोकथाम के लिए कहां-कहां, क्या-क्या उपाय अमले में लाए गए। मलेरिया को लेकर राजस्थान में अब तक जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें उदयपुर शीर्ष पर है। जिले में डेंगू के अब तक 33 मामले आ चुके हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई है।

मलेरिया के तुलनात्मक आंकड़े

वर्ष 2012...13....14...15...16...17...18
मलेरिया पॉजीटिव 2355, 2104, 1080, 1197, 1191, 1460, 934

मलेरिया पीवी 2203, 1938, 972, 1087, 1031, 1197, 797
मलेरिया पीएफ 152, 166, 108, 110, 160, 263, 137

डेंगू

शहरी - 19
ग्रामीण -14

कुल- 33

एक ही राग-भौगोलिक स्थिति

अधिकारियों से मलेरिया और डेंगू फैलने का कारण पूछा तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से लेकर डिप्टी सीएमएओ दोनों एक ही बात कहते है कि यहां की भौगोलिक स्थिति के कारण मलेरिया बढ़ रहा है, हालांकि अब तक ना तो कोई मौत हुई है और गत वर्षों से आंकड़ा कम है। अधिकारी यह नहीं बता पाए कि भौगोलिक परिस्थितियों से मलेरिया को कैसे जोड़ा गया, जबकि अन्य जिलों में भी पहाड़ी गांव-ढाणियां हैं।

उपाय तो किए, पर जगह नहीं बता पाए

डिप्टी सीएमएचओ डॉ राघवेन्द्र राय ने यह जरूर कहा कि समय-समय पर मेरा स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी, डेंगू क्रश कार्यक्रम, क्रेश प्रोग्राम के जरिए मलेरिया पर नियंत्रण के प्रयास किए। विभिन्न स्थानों पर गंबुशिया मछलियां डाली गई तो डीडीटी और पायथ्रेसम स्प्रे किया गया। उनसे स्थानों का नाम जानने का प्रयास किया, लेकिन वे स्थान नहीं बता पाए कि कहां-कहां मछलियां डाली गई और कहां-कहां स्प्रे किया गया।

यहां भी कुछ परेशानी

एमपीडब्ल्यू (पूर्व में मलेरिया इंस्पेक्टर)बीमारियों के उपचार के लिए दूर-दराज के गांव-ढाणियों में पहुंच जाते थे, लेकिन अब ये गिनती के हैं। ऐसे में पहले की तरह लोगों को समय पर दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती। इनका काम था कि एएनएम की तरह लोगों के घरों तक जाते थे, वहां दवाइयां देते थे, लेकिन अब उनकी संख्या 20 से घटकर करीब 7 रह गई है।

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विभाग के प्रयास जारी हैं, हमने अपने लोगों को सतर्क कर रखा है कि उपचार को लेकर बिलकुल कोताही नहीं बरती जाए। मलेरिया से लेकर डेंगू तक रोकने के उपाय भी किए जा रहे हैं।

डॉ दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ उदयपुर