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गर्भवती महिलाओं के ‘भविष्य पर ‘अनदेखी का संकट

80 से 90 प्रसव होते हैं प्रतिमाह, आधी दुनिया के स्वास्थ्य पर भारी है चिकित्सा महकमे की उदासीनता
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गर्भवती महिलाओं के 'भविष्य पर 'अनदेखी का संकट

गर्भवती महिलाओं के 'भविष्य पर 'अनदेखी का संकट

उदयपुर/ लसाडिय़ा. ग्रामीणों के स्वास्थ्य से ही नहीं बल्कि गर्भवती महिलाओं के भविष्य को लेकर भी जिले का चिकित्सा महकमा आंखें मूंदें बैठा है। जिले के लसाडय़ा उपखण्ड मुख्यालय पर मौजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थितियां तो कुछ ऐसी ही कहानी बयां करती है। औसत के हिसाब से यहां प्रतिमाह 80 से 100 प्रसव होते हैं। ये डिलीवरी एमबीबीएस स्तर के चिकित्सक कराते हैं या फिर नर्सिंग स्टाफ के भरोसे प्रसूताओं को छोड़ दिया जाता है। विभागीय अनदेखी के चलते यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। दूसरी ओर मौसमी बीमारियों के बीच सीएचसी का आउटडोर प्रतिदिन दो से तीन सौ मरीज है, पर मरीजों की देखरेख का जिम्मा चंद नर्सिंग स्टाफ के जिम्मे है। सीएचसी में सेवारत तीन कंपाउंडर राउंड द क्लोक ड्यूटी देते हैं। एक के छुट्टी पर होने के दौरान एक कंपाउंडर की यह ड्यूटी 16 घंटे तक हो जाती है। इसी तरह सर्जन के अभाव में सभी ऑपरेशन उपकरण धूल फांक रहे हैं।
रिक्त पदों का सच
सीएचसी में मेल नर्स फस्ट का पद रिक्त है। दो द्वितीय श्रेणी के पद भी रिक्त हैं। इसी तरह मेल नर्स द्वितीय का एक पद खाली है। लैब टेक्निशियन का एक और सहायक प्रयोगशाला का एक पद रिक्त है। खामियां रिक्त पदों तक ही सीमित नहीं है। सीएचसी की पूरी छत बरसात के दिनों में टपकती है। डेंटल चिकित्सक की मौजूदगी के बावजूद सुविधाओं के अभाव में लोगों को आवश्यक सेवाएं नहीं मिल रही। सुविधा के नाम पर 108 रोगी वाहन भी है, लेकिन लाचार एंबुलेंस रैफरल मरीज को अन्यत्र ले जाने में सक्षम नहीं। एक्स-रे मशीन भी भगवान भरोसे परिणाम देती है। जेनरेटर की सुविधा से वंचित मरीजों को कई बार रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है।

इतिहास बताता मौका
केन्द्र का नाम : सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, लसाडिय़ा
स्थापना: करीब 20 साल पहले
दूरदराज के गांव: घाटा, करनागढ़, रिछामउड़ी, आजणी, बेड़ास, खजूरी,रमीणा (करीब 25 किलोमीटर दूर)
पेराफेरी के गांव: लसाडिय़ा, ओवरा, देवलिया, अगड़, धौलिया, चितौडिय़ा, धामनिया, छोगाघाटी, बगेड़ी, कण्डेला, रेलमउड़ी, टटाकिया, पाटलाकुड़ी सहित 50 गांव।

बता चुके हैं समस्याएं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ी सभी समस्याओं के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
डॉ. जगवती, चिकित्सा प्रभारी, लसाडिय़ा सीएचसी

रिक्त पदों का संकट
सीएचसी पर 15 में 10 प्रसाविकाओं के पद रिक्त हैं। नकारा हो चुकी 108 के मामले में भी उच्चाधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बता चुके हैं।
डॉ. साकेत कुमार जैन, बीसीएमओ, लसाडिय़ा