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सुविवि के असिस्टेंट प्रोफेसर ने फिर वायरल किया संदेश, कहा…

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सुविवि के असिस्टेंट प्रोफेसर ने फिर वायरल किया संदेश, कहा...

भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर. बायोटेक विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर टिकमचंद दाकल ने दो दिन में दूसरा संदेश गुरुवार को सोशल मीडिया पर फिर वायरल किया, इसके साथ ही प्रो. राजेश दुबे को बचाने की खेल भी खुलकर सामने आ गया। बुधवार को वायरल हुए संदेश के बाद रजिस्ट्रार ने जो कमेटी बनाई थी, उसमें अध्यक्ष को छोडकऱ अन्य सदस्यों को कुलपति ने बदल दिया। इधर, अजा-जजा प्रकोष्ठ की शिकायत पर रजिस्ट्रार ने एक और कमेटी का गठन कर दिया।

टिकमचंद की ओर से बुधवार को प्रसारित परेशानी होकर आत्महत्या करने जैसा कदम उठाने की स्थिति वाला संदेश वायरल करने पर रजिस्ट्रार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाकर कुलपति के ध्यानार्थ भेजी थी। कुलपति प्रो. शर्मा बेंगलूरु गए हुए थे, जैसे ही वह लौटे तो उन्होंने कमेटी में केवल डॉ आनन्द पालीवाल को रखते हुए अन्य सदस्यों को बदल दिया। इस बीच, टिकमचंद के जातिगत रूप से अपमानित करने के आरोप पर अजा-जजा प्रकोष्ठ का प्रतिनिधि मंडल रजिस्ट्रार भाटी से मिला तो उन्होंने इस आरोप की भी जांच के लिए एक और तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। इस बीच, टिकमचंद ने सोशल मीडिया पर प्रसारित नए संदेश में उल्लेख किया कि कुलपति जेपी शर्मा उनकी बात को हल्के में ले रहे हैं, जबकि दुबे पूरी तरह से गलत बयान दे रहे हैं।
यह कमेटी थी रजिस्ट्रार की
प्रो. आनन्द पालीवाल-अध्यक्ष, प्रो. बीआर बामनिया—सदस्य, प्रो. संजय लोढ़ा, प्रो. जीएस राठौड़

कमेटी में बदलाव किया वीसी ने
प्रो. आनन्द पालीवाल-अध्यक्ष, प्रो. जी सोरल—सदस्य , प्रो. बीएल आहूजा—सदस्य, प्रो. बीएल वर्मा—सदस्य
अजा-जजा मामले की जांच कमेटी
प्रो. सुधा चौधरी-अध्यक्ष, प्रो. हनुमानप्रसाद, आसाराम

दुबे मरीचिका के शिकार हैं कुलपति

दुबे के सिवाय उन्हें कुछ नहीं दिखाई देता। एक होनहार शिक्षक की व्यथा उन्हें दिखाई नहीं दे रही है।
डॉ देवेन्द्रसिंह राठौड़, अध्यक्ष सुटा

मैंने जो कमेटी बनाई थी, उसे कुलपति जी ने बदल दिया है। मैं दूसरी कमेटी के आदेश प्रसारित ही नहीं करूंगा। प्रशासकीय कार्यों के लिए यह कमेटी तो मुझे ही तय करनी थी, इसमें बदलाव समझ से परे है।
एचएस भाटी, रजिस्ट्रार एमएलएसयू

मैं किसी को कैसे बचा सकता हूं। सच्चाई परेशान हो सकती है, पराजित नहीं। जो कमेटी है, वह अपनी रिपोर्ट देगी इस पर कार्रवाई करेंगे। मामले की गंभीरता देखते हुए आनन्द पालीवाल के नेतृत्व में कमेटी गठित कर दी है।
प्रो.जेपी शर्मा, कुलपति एमएलएसयू

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यह है आज का संदेश
प्रिय मित्रों, मैं समाचार पत्र में प्रोफेसर दुबे के बयानों का पूरी तरह से खंडन करता हूं। उन्होंने मुझे परेशान किया, मेरे साथ भेदभाव किया। मेरे पास साक्ष्य हैं जो मैं आवश्यक कार्रवाई के लिए समिति को प्रस्तुत करूंगा। मैं वीसी सर के बयान का भी खंडन करता हूं। मैं उनके बयान से चौंक गया हूं। ऐसा लगता है कि वीसी इस मामले को पर्याप्त गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इस मामले को ढोकने की कोशिश हो रही है, जिससे मुझे आघात लगा है। मैं अपने बयान में बहुत स्पष्ट हूं और मुझे विश्वविद्यालय प्रशासन पर पूर्ण विश्वास है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को गंभीरता से हल नहीं करता है तो मैं अपने पिछले व्हाट्सप संदेश को 1 सैकंड में साबित करूंगा। मैं हार नहीं मानूंगा और अपने जीवन के अंत तक लड़ूंगा। मेरी मृत्यु के बाद कम से कम मेरे विभाग और विभागीय सहयोगियों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों को प्रोफेसर दुबे के उत्पीडऩ से राहत मिलेगी। (अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद)