
4 buffaloes kidnapped, kidnappers asked for 1 lac rupees
हेमन्त गगन आमेटा/भटेवर.. पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय नवानिया एवं पशुधन अनुसंधान केन्द्र वल्लभनगर उदयपुर में संचालित भैंस परियोजना की गतिविधियों का केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार के निदेशक डॉ. एस. एस. दहिया तथा परियोजना प्रभारी डॉ. के. पी सिंह द्वारा अवलोकन किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. एस. एस. दहिया ने कहा कि राजस्थान में भैंस पालन में तेजी से प्रसार हो रहा है। देश व राज्य के दूध उत्पादन में 60 प्रतिशत दूध भैंसों से प्राप्त हो रहा है। उन्होंंने बताया कि भैंस का दूध सभी पोषक गुणों से भरपूर है तथा ए-2 दूध है इससे पशु पालक को अधिक लाभ मिलता है। निदेशक डॉ. एस. एस. दहिया ने भैंस परियोजना के कार्योंं की प्रशंसा की तथा महाविद्यालय के छात्रों के अनुसंधान कार्योंं के लिए केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार के सभी संसाधन व सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश कुमार धूडिय़ा ने बताया कि दक्षिणी राजस्थान की सूरती भैंस नस्ल का इस क्षेत्र के पशुपालक व्यवसाय में काफी योगदान है तथा इसके उन्नयन व संवर्धन में विश्वविद्यालय और अधिक प्रयास कर रहा है। डॉ. के. पी. सिंह ने भी फेकल्टी को सम्बोधित करते हुए देश में भैंस पालन की उपयोगिता व परिदृश्य पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पशुपालकों के लिए एक हिन्दी भाषा में फोल्डर सूरती भैंस एक दृष्टिश का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन परियोजना प्रभारी डॉ. मितेश गौड ने किया। डॉ. शिव शर्मा, अकादमिक समन्यवक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
Updated on:
10 May 2019 07:38 pm
Published on:
10 May 2019 07:38 pm
