
- 20 साल बाद देवस्थान को सौंपी जमीन पर फिर खातेदारी का दावा
चारभुजा. देवस्थान विभाग द्वारा वाहनों के ठहराव और धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जारी टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। टेंडरधारी द्वारा मंदिर की पार्किंग में निर्धारित शुल्क वसूलने और वाहनों को व्यवस्थित व कैमरों की निगरानी में खड़ा कराने के बाद कुछ पुजारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि पार्किंग में लगाए गए कैमरे भी तोड़ दिए गए।
पूर्व सरपंच व पुजारी नाथूलाल गुर्जर और भगवानलाल राजावत के नेतृत्व में पुजारी तहसील पहुंचे और पार्किंग की जमीन की नाप के लिए ज्ञापन दिया। तहसीलदार तोलाराम देवासी व पटवारी मुकेश कुमार जाट ने नक्शे के अनुसार नापचोक कर खातेदारों की जमीन को लाल निशान लगाकर चिह्नित किया। इसके बाद पार्किंग में प्रवेश का रास्ता बंद हो गया और खातेदारों ने पत्थर डालकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित खातेदारों ने करीब 20 वर्ष पूर्व मंदिर के रास्ते के लिए अपनी खातेदारी भूमि देवस्थान विभाग को सुपुर्द की थी। देवस्थान द्वारा वर्ष 2008 में आरटीडीसी के तहत पार्किंग व धर्मशालाओं पर करीब एक करोड़ रुपए के कार्य कराए गए थे, जिसकी कार्यकारी एजेंसी ग्राम पंचायत गढ़बोर थी।
टेंडरधारी ललित गुर्जर ने बताया कि 15 वर्षों के एग्रीमेंट के तहत दोनों धर्मशालाओं और पार्किंग स्थलों पर निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है। धर्मशालाओं में पंखे, बिस्तर, पलंग, शौचालय, स्नानघर व रंग-रोगन सहित मरम्मत कार्य भी कराया गया है। विरोध कर रहे पुजारियों का एक गुट दोनों पार्किंग और धर्मशालाओं में निशुल्क सुविधा की मांग कर रहा है।
ग्रामीणों ने देवस्थान की 63 बीघा आरक्षित भूमि से कथित कब्जे हटाने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यह भूमि जल झूलनी मेले के लिए आरक्षित थी और कब्जों के कारण मेला क्षेत्र लगातार सिमट रहा है।
Updated on:
29 Aug 2026 06:02 am
Published on:
29 Aug 2026 06:02 am
