
उदयपुर की कई बस्तियों में खाना पहुंचा, लोगों ने स्वीकारा, शराब बांटने पर कोई हंसा, कोई भाग निकला...
उदयपुर . कच्ची बस्तियां वोट बैंक के लिए बसाई जाती है...यहां हर व्यक्ति के पास वोटर व राशनकार्ड है। इन लोगों को नेता अपने पक्के वोटर मानते हैं, जो रातोंरात नतीजा बदलने की ताकत भी रखते हैं। आमदिनों में यहां कोई झांकना भी पसंद नहीं करता लेकिन चुनाव प्रचार थमते ही बुधवार से इन बस्तियों में हलचल बढ़ गई। बड़ी ही नहीं, छोटी पार्टियों के नेताओं के पदाधिकारी, कार्यकर्ता गाडिय़ां लेकर पहुंच गए। वे वहां अब हाल-चाल पूछने के अलावा लोगों की गिनती पूछ रहे हैं। कितने लोग हैं, कैसे और कहां मिलेंगे, क्या करना होगा। यह गिनती मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने के लिए उन तक खाना व शराब पहुंचाने के लिए की जा रही है। देर रात कई जगह खाना व शराब भी बंटा लेकिन पूछते ही सब हंसकर निकल गए।
खाना बंटना तो आम, शराब बाहर जाकर ले लेते है
लालमगरी क्षेत्र में महिला ने खुद स्वीकार किया कि कच्चीबस्ती में चुनाव के दौरान ही बाहरी लोग पहुंचते हैं। खाना बांटना तो आम है, लेकिन शराब कुछ लोग ही पीते हैं। वे रात को बाहरी क्षेत्रों में जाकर पीकर आते हैं। कई परिवारों में रात में लड़ाई-झगड़े होते हैं। अभी बस्ती में आने वाले लोग यह कह रहे हैं कि वे सडक़, नाली व पनघट बनवा देंगे लेकिन आम दिनों में अगर उनसे शिकायत करते हैं तो बोलते हैं कि हमने थोड़ी ठेका लिया। कौन सी पार्टी के लोग आए, इसके बारे में पूछते ही पास खड़ी महिला बोल पड़ी, हर कोई आता है। बाद में वोटिंग के दौरान बकायदा गाडिय़ों में भरकर बूथ पर भी लेकर जाते हैं।
बेरोजगार हैं, फिर रहे हैं युवा साथ में
इन्द्रा कॉलोनी कच्चीबस्ती के निवासियों का कहना था कि उनके घरों के कई युवा पहले ही अलग-अलग पार्टियों के चुनाव प्रचार में लगे हैं। रोज उनके साथ गाडिय़ों में घूमने के साथ खाना भी खा रहे हैं। बेरोजगार होने से वे लालच में घूम रहे हैं। मोहल्ले में नेताजी के आदमियों को लाकर लालच दे रहे हैं। पेयजल समस्या को लेकर अभी कह रहे हैं कि जल्दी पाइप लाइन डलवा देंगे जबकि पांच साल से कोई सुनने व देखने भी नहीं आया। खाना व शराब बांटने की बात पर वे दबी जुबान से खाने के पैकेट की बात स्वीकार कर गए।
चुनाव में तो मौज हो गई
रामनगर कच्चीबस्ती के बांशिदों का कहना था कि हमारे यहां अधिकतर युवा नशे व जुएं सट्टे के आदी हैं। घर-परिवार से दूर रहने के कारण चुनाव में उनकी मौज है। अभी बस्ती में कोई पूछने नहीं आया लेकिन बस्ती के ही नेताजी अलग-अलग पार्टियों को वोट देने का प्रलोभन दे रहे हैं। लोग भी समस्या को हल करने के लिए उनकी बातों में आ रहे हैं।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए बिना दबाव, प्रभाव, प्रलोभन के मताधिकार का प्रयोग सुनिश्चित करवाने का दायित्व चुनाव आयोग का है। यह स्थानीय प्रशासन के अधीन है, उनका दायित्व बनता है कि इन बस्तियां व अन्य जगह पर नजर रखे। चुनाव प्रभावित करने वाली गतिविधियां इनमें खाना, पैसा व शराब बांटने, डराने धमकाने, शपथ दिलाने आदि समस्त कृत्य प्रतिबंधित है, इनकी सख्ती से पालना करनी चाहिए है, लेकिन नेताओं के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं करते है। - अरुण व्यास, वरिष्ठ अधिवक्ता
Published on:
06 Dec 2018 11:58 am
