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Rajasthan Health : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज संग मिलेगी प्रीमियम सुविधा, ब्लूप्रिंट तैयार

Rajasthan Health : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में फ्री इलाज संग प्रीमियम सुविधा मिलेगी। प्रीमियम इलाज का ब्लूप्रिंट तैयार है। इस प्रस्ताव को अगर राज्य सरकार बजट 2026-27 में मंजूरी देती है, तो राजस्थान इस सुविधा को देने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।

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Rajasthan Government hospitals will offer free treatment with premium facilities blueprint has been prepared

फोटो - AI

Rajasthan Health : सब कुछ तय योजना से हुआ तो राजस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर के प्राचार्य डॉ. विपिन माथुर ने सरकारी अस्पतालों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, सेवाओं में समावेशी और हर वर्ग के लिए आकर्षक बनाने वाला एक अभिनव मॉडल तैयार किया है। उनके कॉटेज वार्ड-इंश्योरेंस आधारित उपचार मॉडल (हाइब्रिड पब्लिक हेल्थ मॉडल) को राज्य स्तर पर विस्तार देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक होनी है।

राज्य सरकार इस प्रस्ताव को बजट 2026-27 में मंजूरी देती है, तो राजस्थान देश का पहला राज्य बन सकता है, जहां सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज के साथ प्रीमियम सुविधा का विकल्प भी मिलेगा।

क्यों खास है यह मॉडल

अब तक सरकारी अस्पतालों की पहचान मुख्यत: नि:शुल्क इलाज तक सीमित रही है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां) के माध्यम से गरीब और वंचित वर्ग को व्यापक लाभ मिला। एक बड़ा वर्ग मध्यम, उच्च-मध्यम और उच्च आय वर्ग आज भी सुविधाओं के अभाव में निजी अस्पतालों की ओर रुख करता है, जबकि भरोसा सरकारी डॉ€क्टरों पर ही होता है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज का यह मॉडल इसी खाई को पाटता है।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज

उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज पहले ही इस दिशा में एक मजबूत उदाहरण बन चुका है। यहां मां योजना के तहत प्रतिवर्ष करीब 1 लाख मरीजों को लाभ पहुंचाते हुए 100 करोड़ रुपए से अधिक का €क्लेम राजस्व दर्ज किया। संस्थान को सीएम ए€क्सीलेंस अवार्ड और ई-अटल गवर्नेंस जैसे अवार्ड मिल चुके हैं।

निजी बीमा का पैसा सरकारी अस्पतालों में

इस समय निजी और कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस का बड़ा हिस्सा निजी अस्पतालों को जाता है। प्रस्तावित मॉडल के तहत यदि सरकारी मेडिकल कॉलेज और बड़े जिला अस्पताल टीपीए या पीपीएन नेटवर्क से जुड़ते हैं, तो बीमा कंपनियों से मिलने वाला राजस्व सीधे सरकारी अस्पतालों को मिलेगा। यह राशि अस्पताल विकास निधि (आरएमआरएस) में जमा होगी। उसी पैसे से क्रिटिकल केयर, आधुनिक उपकरण, डिजिटल हेल्थ और स्वच्छता सुविधाएं मजबूत की जाएंगी।


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