
अब काम चाहिए, कागजों में खेले खेल तो जाएंगे जेल...आवारा मवेशियों एवं सडक़ों को लेकर हाइकोर्ट की सख्ती
मुकेश हिंंगड़़/उदयपुर . स्मार्ट सिटी के टॉप शहरों के बाद भले ही उदयपुर दुनिया का तीसरा सुंदर शहर घोषित हो गया है लेकिन जगह-जगह गड्ढे व आवारा पशुओं का विचरण इस खूबसूरती पर दाग लगा रहा है। पशुओं के झगड़े में गत वर्ष एक विदेशी पर्यटक घायल हो गई। उसके बाद से ऐसे पशुओं को पकडऩे के लिए पता नहीं कितनी टीमें लगाई और खूब खर्चा किया लेकिन अभी तक यह नासूर भरा नहीं। इसी तरह शहर में जगह-जगह गड्ढे राहगीरों व वाहन चालकों को चोटिल कर रहे हैं। कागजों में तो जनता की कमाई इन गड्ढों व सडक़ों को ठीक करने पर खर्च दिखाई जा रही है लेकिन हकीकत में गड्ढे प्रमुख रास्तों से लेकर गली-मोहल्लों तक है। अब हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अफसरों को तीन सप्ताह के भीतर इस संबंध में व्यवस्था करने को कहा है, अन्यथा जेल जाने की चेतावनी दी है। फिलहाल तो कोर्ट की मौखिक टिप्पणी का यहां कोई असर नजर नहीं आ रहा।
केस 1
8 नवंबर 2017 को जगदीश मंदिर व सिटी पैलेस के बीच गाय ने फ्रांस की 70 साल की महिला पर्यटक को सींग मारकर घायल कर दिया। उसे चिकित्सालय में भर्ती करवाना पड़ा।
केस 2
22 नवंबर 2017 को शहर के आयड़ क्षेत्र में एक सांड ने लोगों को परेशान कर दिया। बाद में वह घर में घुस गया। इस दौरान परिवार पहली मंजिल पर था। शोर मचाकर और लकड़ी बताकर सांड को बाहर निकाला।
यहां हालात खराब
शहर के चौराहों, मुख्य सडक़ों और पर्यटन स्थलों के आसपास बड़ी संख्या में आवारा मवेशी देखने को मिल जाएंगे। शहर के देहलीगेट, फतहपुरा, उदियापोल, हाथीपोल चौराहा, टाउनहॉल रोड, प्रतापनगर से सेवाश्रम होकर सूरजपोल रोड, बलीचा से उदियापोल, सुखेर से कोर्ट चौराहा, रामपुरा से चेतक सर्कल, अशोकनगर मुख्य मार्ग, विश्वविद्यालय मार्ग, हिरणमगरी रोड की सडक़ों पर आवारा मवेशी मिल जाएंगे। इसी प्रकार पर्यटन स्थल गणगौर घाट, दूधतलाई, सहेलियों की बाड़ी रोड, फतहसागर रोड, गोवर्धन सागर आदि क्षेत्र में आवारा मवेशियों ने परेशान कर रखा है।
गड्ढों से बच कर गुजरना मुश्किल
जहां एक ओर आवारा मवेशियों ने सडक़ पर चलना मुश्किल कर रखा हैं, वहीं सीवरेज कार्य एवं बारिश से बुरी तरह उधड़ी सडक़ के गड्ढ़े परेशानी का सबब बने हुए हैं। शहर की सडक़ों पर इतने गड्ढ़े हो गए हैं कि जरा सी सावधानी चूकते ही गाड़ी का पहिया गड्ढ़े में। लम्बे समय से इस स्थिति के चलते आएदिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं, वहीं लगातार ऐसी सडक़ पर चलने से वाहन चालकों की रीढ़ की हड्डी नुकसान पहुंच रहा है।
हाइकोर्ट ने इसलिए दिखाई सख्ती
हाइकोर्ट ने जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में सडक़ों को आवारा पशुओं व गड्ढ़ों से मुक्त कराने के लिए तीन सप्ताह में व्यवस्था विकसित करने को कहा है। साथ ही अदालती आदेशों की पालना में ढिलाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए मौखिक टिप्पणी की है कि अधिकारियों को जेल भेजने के अलावा कोई चारा नहीं है। पालना के लिए अंतिम मौका देते हुए सुनवाई 31 अगस्त तक टाल दी है।
इनका कहना है....
नगर निगम नियमित रूप से आवारा मवेशियों को पकडऩे का अभियान चला रही है। काइन हाउस की क्षमता करीब 300 से 350 पशु है। टीम शहर में घूमती है और जहां आवारा मवेशी दिखते हैं, उनको पकड़ कर काइन हाउस ले जाती है।
- नरेन्द्र श्रीमाली, स्वास्थ्य अधिकारी (नगर निगम)
Published on:
14 Aug 2018 07:25 pm
