
धीरेन्द्र जोशी/उदयपुर . रोजगार देने का वादा कर राजनीतिक दल सत्ता में आते और जाते रहे हैं लेकिन बेरोजगारी दूर होने का नाम नहीं रही है। जिस अनुपात में बेरोजगार बढ़ रहे हैं, उतने रोजगार सृजित नहीं हो रहे हैं। नए कल-कारखाने नहीं लग रहे हैं, वहीं सरकारी क्षेत्र में नौकरियों अटकी पड़ी है जिससे हर सरकारी विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजस्थान पत्रिका ने जब युवाओं से उनके मुद्दों के बारे में चर्चा की तो उनकी यह पीड़ा सामने आई।
रिक्त पदों अनुपात में निकले नियुक्तियां
जितेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि वे २०१६ से लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं। गिनी-चुनी नियुक्तियां निकलने से कई अभ्यर्थी नौकरी से वंचित रह जाते हैं। एेसे में सरकार का चाहिए कि रिक्त पदों के अनुपात में नियुक्तियां निकालें।
नहीं मिल रहा रोजगार
कपिलदेव चौधरी ने बताया कि सरकारी क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। हर विभाग कर्मचारियों की कमी से बदहाल है। इसके बावजूद नियुक्तियां नहीं निकाली जा रही है। रोजगार समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जो उपलब्ध हैं, उनमें भी न्यायिक अड़चन है। रोजगार व्यवस्था में सुधार की काफी आवश्यकता है।
Updated on:
22 Oct 2018 08:21 pm
Published on:
22 Oct 2018 08:21 pm
