5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रक्षाबंधन इस बार नहीं भद्रा की छाया – दिनभर बहनें बांध सकेंगी राखी

रक्षाबंधन इस बार नहीं भद्रा की छाया - दिनभर बहनें बांध सकेंगी राखी
2 min read
Google source verification
Raksha Bandhan

रक्षाबंधन इस बार नहीं भद्रा की छाया - दिनभर बहनें बांध सकेंगी राखी

प्र्र्रमाेद साेनी/ उदयपुर . भाई-बहन के प्रेम का पर्व (Raksha Bandhan 2019)रक्षाबंधन गुरुवार को उत्साह व उल्लास से मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का छाया नहीं रहेगी जिससे बहनें दिनभर राखी बांध सकेंगी। इधर, शहर के बाजारों में मंगलवार को (Rakhi Festival)त्योहारी खरीदारी चरम पर रही। इस बार रक्षाबंधन एवं स्वाधीनता दिवस एक ही दिन होने से बाजार की रौनक अनोखी है। कहीं स्टॉल पर राखी तो कहीं तिरंगे सजे हैं। जहां एक ओर बहनें अपने भाइयों के लिए (Rakhi )राखियां खरीद रही थी, वहीं कई लोग तिरंगे लेते दिखे। रक्षाबंधन पर्व की खरीदारी के चलते राखियों, मिठाइयों, नमकीन, नारियल, पूजन सामग्री के काउंटर पर दिनभर विशेष भीड़ रही। शहर के धानमंडी, सूरजपोल, सिंधी बाजार, हाथीपोल, बापू बाजार में खरीदारों की भीड़ के कारण दिनभर रह-रह कर जाम लगता रहा।

रक्षाबंधन व स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन होने से पर्व का उत्साह दोगुना हो गया है। स्वतंत्रता दिवस के कारण बाजार में विशेष तिरंगे रंग की(Rakhi)राखियां भी आई हैं। साथ ही बच्चों के लिए पबजी, एवेंर्स, बाहुबली, स्पाइडरमैन, कार्टून आदि राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए खासकर झुमके वाली राखियां बाजार में खूब बिक रही हैं। महिलाओं में ब्रेसलेट, डायमंड, लॉकेट, चूड़ा, कुंदन, भैया-भाभी और बूटी आदि राखी उपलब्ध हैं। इसी तरह भाई-बहन की तस्वीर लगी हुई राखी भी युवाओं को खासकर पसंद आ रही है। ये पर्सनलाइज्ड राखियां होती हैं जिसमें भाई-बहन की तस्वीर लगी होती है और इसे ऑर्डर पर बनवाई जा रही है।

दो दिन रहेगी पूर्णिमा तिथि

पं. भरतकुमार खण्डेलवाल के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं होने से बहनें दिनभर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात में भी राखी बांधी जा सकेगी। यह संयोग बरसों के बाद बना है। पूर्णिमा तिथि बुधवार अपराह्न ३.४१ से शुरू होकर गुरुवार शाम ५.५४ बजे तक रहेगी। उदयमान सिद्धांतानुसार व एक प्रहरयुक्त तिथि सम्पूर्ण दिवस मान्य होती है। उन्होंने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर गुरु-पूर्णा सिद्धी योग, गुरु श्रवण-ध्वजयोग, गुरु-धनिष्ठा श्रीवत्स योग, नैसर्गिक योग में सौभाग्य योग एवं शोभन योग का संयोग बन रहा है।

घाट पर होगा श्रावणी उपाकर्म

रक्षाबंधन पर शहर की पिछोला, फतहसागर, गोवद्र्धनसागर के घाटों पर ब्राह्मण समाज के लोग सामूहिक रूप से श्रावणी उपाकर्म करेंगे। इस दौरान पंडित झील के पानी में बैठकर तर्पण करेंगे।