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video: भारत के टुकड़े करने वालों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे: साध्वी ऋतम्भरा

गणतंत्र दिवस पर भागवत कथा बनी राष्ट्रकथा -भारतवर्ष की रक्षा का संकल्प कराया साध्वीश्री ने

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sadhvi ritambhara

उदयपुर . शहर के बीएन विश्वविद्यालय भागवत धाम में चल रही भागवत कथा गणतंत्र दिवस पर मानो राष्ट्रकथा हो गई। प्रभु भक्ति के साथ साध्वी ऋतम्भरा ने खचाखच भरे पाण्डाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को राष्ट्रभक्ति का संकल्प दिलाया और कहा कि भारतमां के टुकड़े करने वालों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि देशवासी मिलकर ऐसा अनुष्ठान करें कि बुरी नजर भारत का बाल भी बांका न कर पाए। 69वें गणतंत्र पर खुदीराम बोस जैसे शहीदों को याद करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने युवा पीढ़ी से कहा कि हमारा सुपरस्टार सीमा पर शत्रु के सामने सीना तानकर खड़ा रहने वाला भारत माता का लाल है। उन्होंने धर्मान्तरण को देश के लिए खतरा बताते हुए कहा कि सेवा की आड़ में धर्मान्तरण के षड़यंत्र को समझना होगा। सेवा के नाम पर धर्मान्तरण करना सेवा नहीं सौदा है।

साध्वीश्री ने शहीदों को याद करते हुए ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ गीत गाया तो पूरा पाण्डाल देशभक्ति के जोश में रोमांचित हो उठा। आगे से पीछे तक सभी नाचे। शुक्रवार को संख्या इतनी थी कि पाण्डाल छोटा पड़ गया। साध्वीश्री ने सभी से प्रार्थना करवाई कि हे भारतमाता हमें सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना भरो, परदुखकातरता का भाव दीजिये, उत्तम लक्ष्य दीजिये। सभी श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर अखण्ड भारत के जयकारे लगाए और कैंसरकारक तम्बाकू, दुव्र्यसन छोड़ने का संकल्प भी लिया। साध्वीश्री ने गऊमाता के दूध को अमृत बताते हुए कहा कि गऊमाता हमारी संवेदनाओं को समझती है। उन्होंने ह्वेनसांग का जिक्र करते हुए कहा कि उसने लिखा है कि उसे पूरे भारत में कहीं भिखारी और अशिक्षित व्यक्ति नहीं मिला। लेकिन आज का भारत इंडिया हो गया है। गऊमाता की सेवा नहीं की जाती, लेकिन घरों में श्वान पाले जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे श्वान पालने का विरोध नहीं करती, हर जीव मात्र के प्रति हमारी ऐसी ही भावना होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि गऊमाता को पालने में तकलीफ क्यों होती है। शुक्रवार को कथा में माखन चोरी, गोवर्धन पूजा आदि प्रसंग हुए। भगवान को छप्पन भोग धराया गया। कान्हा और बाल सखाओं ने मटकियों से चोरी के बाद श्रद्धालुओं में माखन-मिश्री का प्रसाद लुटाया। इस दौरान ‘श्री गोवर्धन महाराज थ्हारे माथै मुकुट बिराज रह्यो’, ‘कन्हैया मेरो वारो’ आदि भजनों पर भक्त झूमकर नाचे।

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व्यासपीठ पूजन

शुक्रवार को मुख्य यजमान प्रकाश अग्रवाल, नगर विकास प्रन्यास के अध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली, समिति अध्यक्ष दिनेश भट्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पारस सिंघवी, महिला समिति अध्यक्ष वीणा अग्रवाल, यजमानगण वीरेन्द्र डांगी, रजनी डांगी, धारेन्द्र सालगिया, मनीष गर्ग, तरुण गर्ग, बसंत कुमार दक ने व्यासपीठ पूजन किया। प्रसाद का आशीर्वाद मुकुन्द लाल अग्रवाल, सुरेश मित्तल (ब्रजवासी फाउंडेशन) ने लिया। आरती में उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, आलोक संस्थान के निदेशक प्रदीप कुमावत, हरीशचंद्र खण्डेलवाल, संतोष भटनागर, अजय-ऋतु गुप्ता आदि उपस्थित थे। इस मौके पर सर्वमंगला पीठम के अध्यक्ष नंदकिशोर अग्रवाल भी उपस्थित थे। उन्होंने उदयपुर को भामाशाहों की धरा बताते हुए कहा कि विनोद अग्रवाल, राधेश्याम सोनी, प्रकाश अग्रवाल, कैलाश राजपुरोहित, अशोक दोशी, परमेश्वर अग्रवाल सर्व मंगला पीठ के ट्रस्टी बनते हुए सहयोग का संकल्प लिया है।