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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में हुआ बड़ा खुलासा, गवाह बोला धमकी पर मजबूरी में दिए थे बयान, अगर उस वक्त झूठ नहीं बोलता तो मेरे साथ हो जाता ऐसा

सीबीआई ने उसे गिरफ्तारी की धमकी दी थी, इस पर मजबूरी में बयान दिए थे।
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sohrabuddin tulsi encounter case: Witness confess the truth udaipur

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में हुआ बड़ा खुलासा, गवाह बोला धमकी पर मजबूरी में दिए थे बयान, अगर उस वक्त झूठ नहीं बोलता तो मेरे साथ हो जाता ऐसा

मोहम्मद इलियास / उदयपुर . बहुचर्चित सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर प्रकरण में सोमवार को सबसे अहम गवाह उपाधीक्षक भंवरसिंह हाड़ा के मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में बयान हुए। हाड़ा ने भी पूर्व में दिए बयानों के बारे में स्पष्ट कहा कि सीबीआई ने उसे गिरफ्तारी की धमकी दी थी, इस पर मजबूरी में बयान दिए थे।


सीबीआई के पूर्व में दर्ज बयानों में हाड़ा ने बताया कि हमीद लाला हत्याकांड के आरोपित तुलसी ? प्रजापति को 26 नवम्बर 2005 को गिरफ्तार किया था। तीन दिन रखने के बाद 29 नवम्बर को तुलसी की गिरफ्तारी बताई थी लेकिन सोमवार को दिए बयानों में स्पष्ट कहा कि तुलसी की गिरफ्तार 29 को ही हुई थी और अगले दिन उसे कोर्ट में पेश कर 10 दिसम्बर तक पुलिस रिमांड लिया था। रिमांड अवधि में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व गुजरात के पुलिस अधिकारियों के अलावा एटीएस गुजरात के आर के पांडे ने पूछताछ की थी।


पूर्व में दिए बयानों से मुकरे
हाड़ा ने सीबीआई को पूर्व में दिए बयानों में बताया था कि हाथीपोल थाने में हत्या की फाइल में आजम, सिल्वेस्टर, मुदस्सर, बंटी गिरफ्तार हो चुके थे तथा तुलसी प्रजापति व सोहराबुद्दीन की गिरफ्तारी बाकी थी। थाने में नियुक्ति के दो तीन दिन बाद ही एसपी दिनेश एम.एन., सीआई अब्दुल रहमान, सब इंस्पेक्टर हिमांशु व श्यामसिंह सोहराबुद्दीन की तलाश में अहमदाबाद गए थे।

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जहां गुजरात पुलिस के सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर हुआ था। 26 नवम्बर 2005 को उपाधीक्षक सुधीर जोशी ने अपने कार्यालय में मुझे बुलाकर कहा कि हाथीपोल के प्रकरण संख्या 214/04 धारा 302 का अभियुक्त तुलसी अभी भीलवाड़ा में रह रहा है। सीआई रहमान ने फोन कर तुलसी जिस मकान में रहता है उस मकान मालिक के फोन नम्बर उपलब्ध करवाए है।

उसे नम्बर के आधार पर जोशी ने अपने सोर्स से पता कर उस मकान मालिक चंदन झा के मकान का पता मालूम किया। बाद में जोशी मुझे, सीआई रणविजय सिंह , कांस्टेबल ओमप्रकाश, भंवरलाल, जगदीश, देवेन्द्र, गोपालसिंह के साथ रवाना हुए। दोपहर दो-तीन बजे भीलवाड़ा पहुंच गए। जोशी ने अपने परिचित को तुलसी जहां रहता था उस मकान की जानकारी ली, फिर हम सभी आजाद नगर में कोमल झा के मकान पर गए। जोशी व मैं जाप्ते को वहीं खड़ा कर सादे कपड़ों में मकान में अंदर गए। बरामदे में दो व्यक्ति दिखे।

जोशी ने तुलसी को देख इशारे से समझाया, मैंने तुलसी को पकड़ लिया। तुलसी छटपटाते हुए छुड़वाने लगा। जोशी ने सर्विस तान कर अपना परिचय दिया। उसके बाद तुलसी को बाहर लाए, जहां जाप्ते ने आरेापित को काबू में किया। उसकी तलाशी में कमरे की चाबी मिली। तलाशी ली तो वहां एक मोबाइल व नकद पैसे मिले। तुलसी को वहां से पकड़ कर रात 8 बजे उदयपुर लाए।