
उदयपुर।
देश के चर्चित सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर प्रकरण (Sohrabuddin Tulsi Prajapat Encounter Case) में मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court) में चल रही अंतिम बहस बुधवार को पूरी हो गई। बहस के दौर में सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक बीपी राजू ने कुछ रूलिंग पेश करते हुए स्वीकारा कि हमारे अनुसंधान में कई खामियां रही हैं, सभी कडिय़ों को हम जोड़ नहीं पाए।
पीपी बीपी राजू ने कहा कि सीबीआई के पास केस का अनुसंधान पांच वर्ष के बाद आया था। इससे पहले सीआईडी ने अनुंसधान किया था जिन्होंने इस केस को काफी खराब कर दिया था। हमारे सभी बड़े गवाह पक्षद्रोही हो गए। कुछ गवाहों को हम अदालत में लाने में भी नाकाम रहे हैं। उन्होंने कोर्ट में कुछ रूलिंग पेश की जो पक्षद्रोही गवाहों के बयानों को साक्ष्य में मान्य रखने और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर हुए फैसलों से संबंधित हैं।
केस के पहले अनुसंधान अधिकारी रहे आरके पटेल की ओर से वकील दिनेश गज्जर ने अंतिम बहस में दलील दी। उन्होंने बताया कि पटेल ने पूरी मदद की थी और सीबीआई ने उन्हें ही आरोपी बना दिया। सीबीआई की ओर से मेरे मुवक्किल पर यह आरोप था कि उसने गवाहों को धमका कर आरोपियों के पक्ष में बयान करवाए थे। यह आरोप पूरी तरह गलत हैं।
वकील गज्जर ने कहा कि पटेल ने अनुसंधान के दौरान तुलसी के मकान मालिक भीलवाड़ा के चंदन झा, कोमल झा व मुन्नीदेवी के सीआरपीसी की धारा 161 व धारा 164 में कोर्ट में बयान करवाए थे। इन गवाहों ने ट्रायल कोर्ट में बयान दिए हैं।
गज्जर ने दलील पेश की कि तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर हिम्मत सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारियों ने ट्रायल कोर्ट में बयान देते समय रोते हुए सीबीआई पर आरोप लगाया था कि सीबीआई ने उन्हें डरा धमका कर गिरफ्तारी की धमकी देकर कोर्ट में झूठे बयान करवाए थे।
प्रकरण में 3 दिसंबर से अंतिम बहस शुरू हुई थी। तीन दिनों में सीबीआई सहित 22 आरोपियों की ओर से संबंधित वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की।
Updated on:
06 Dec 2018 10:35 am
Published on:
06 Dec 2018 10:34 am
