5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

video : नए साल पर शुभकामनाएं देते डाक टिकट के इनके कलेक्‍शन को देखेंगे तो आप भी रह जाएंगे दंग

नए साल के खास मौकों पर हर जगह शुभकामनाएं देते तमाम डाक टिकट लेकसिटी के संग्रहकर्ता विनय भानावत के संग्रह में मौजूद हैं।

2 min read
Google source verification
stamp collection

उदयपुर . होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस और नए साल के खास मौकों पर हर जगह शुभकामनाएं देने की परम्परा है। दरअसल, इस माध्यम से हम सभी अपनों को भावनात्मक रूप से याद करते और अपनी उपस्थिति का अहसास भी कराते हैं। पहले लोग विशेष अवसरों पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाइयां देते थे। कालान्तर में बधाई पत्रों के साथ फोन और अब मोबाइल मैसेज के जरिए शुभकामनाएं प्रेषित करने का दौर चल निकला।

विदेशों में क्रिसमस सहित अनेक महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष डाक टिकट के जरिए भी शुभकामनाएं एक छोर से दूसरे छोर तक पहंचती रही। लेकसिटी के संग्रहकर्ता विनय भानावत ने बताया कि भारतीय डाक विभाग ने भी 17 दिसम्बर 1990 में पहली बार शुभकामनाओं वाले दो डाक टिकट जारी किए। एक पर दिल और फूल बने थे तो दूजे पर सजा-धजा हाथी। इसके बाद 30 सितम्बर 1991 में एक बार फिर दो डाक टिकटों का सेट जारी हुए। इसी श्रंृखला में 18 दिसम्बर 2001 को दो डाक टिकट (आतिशबाजी तथा फूलों से नववर्ष का स्वागत करती तितलियां) जारी हुए। इसी तरह, 30 अक्टूबर 2003, 25 अक्टूबर 2004, 15 दिसम्बर 2007, 1 दिसम्बर 2009 के बाद 23 दिसम्बर 2016 सहित अब तक शुभकामनाओं पर कुल 23 डाक टिकट जारी हो चुके हैं।
भानावत बताते हैं कि बाकायदा अनेक विषयों सहित ये तमाम डाक टिकट उनके संग्रह में मौजूद हैं। इनके अलावा डाक विभाग ने शुभकामनाओं वाले लिफाफे भी जारी किए। इस माध्यम से आमजन के दिलों तक सीधे दस्तक देना सुलभ हो जाता है।

READ MORE : #SWAG से किया नए साल का स्वागत, उदयपुर में नए साल के जश्न की देखें तस्वीरें

मिरेकल्स वल्र्ड रिकॉर्ड में शुमार हुआ विनय का नाम

उदयपुर. दुनिया के श्रेष्ठ 100 रिकॉर्डधारियों में शुमार लेकसिटी के विनय भानावत के नाम एक और विश्व
रिकॉर्ड बन गया। जब भ्‍ाारतीय करेंसी में सात सौ छियासी संख्‍या वाले 92 हजार नोट संग्रहित करने के कारण मिरेकल्स वल्र्ड रिकॉर्ड, इंग्लैंड की ओर से उन्हें हिंदुस्तान स्थित कार्यालय प्रमुख्‍ा थिम्‍‍िपरी रविंद्र ने स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रेषित किया।