
आखिर क्या किया गया जगदीश मन्दिर के बचे पत्थरों का ...पढ़िए खबर
प्रमोद सोनी/उदयपुर. शहर के भट्टियानी चौहटा में एक मात्र महालक्ष्मी मंदिर है। दीपोत्सव पर यहां विशेष दर्शन होते है। दीपोत्सव पर यहां चार दिन उत्सव रहता है। मंदिर पर व अंदर श्रीमाली समाज विद्युत सजा करता है। व जगदीश चौक से रंग निवास तक भट्टियानी चौहटा दीपोत्सव समिति की ओर से विद्युत सजा की जाती है।धनतेरस से खेखरे तक यहां मंदिर पर दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है। महालक्ष्मी का प्राकृटोत्सव श्राद पक्ष की अष्टमी को होता है। मान्यता है कि महालक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुए है।
श्रीमाली जाती सम्पति व्यवस्था ट्रस्ट के अध्यक्ष कन्हैयालाल त्रिवेदी ने बताया कि महालक्ष्मी मंदिर तत्कालीन महाराणा जगत सिंह के वक्त बना था। यह मंदिर करीब 400 वर्ष पुराना है। इस मंदिर का निर्माण जगदीश मंदिर के निर्माण के वक्त जो पत्थर व सामग्री बच गई थी उससे मंदिर का निर्माण हुआ था, वही इस मंदिर के निर्माण के बाद जो सामग्री बची उससे मंदिर के सामने गणेश मंदिर का निर्माण करवाया था।उन्होने बताया कि महालक्ष्मी की प्रतिमा भीनमाल से लाए थे।व यह प्रतिमा सफेद पत्थर की हाथी पर बैठी हुई है। उन्होने बताया कि महालक्ष्मी श्रीमाली समाज की कुलदेवी है।
Updated on:
06 Nov 2018 04:14 pm
Published on:
06 Nov 2018 11:36 am
