
अजमेर. नसीराबाद रोड स्थित बीर तालाब के निकट अरावली पर्वतमाला में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद अवैध खनन जारी है। फोटो : जय माखीजा (ड्रोन)
Rajasthan Aravalli : अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने और इससे जुड़े अहम मुद्दों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 5 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी का गठन किया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले की 25 मई को सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह कमेटी 31 अगस्त से पहले अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपेगी। उसके बाद 7 सितंबर को इस मामले की सुनवाई होगी। यह कदम अरावली क्षेत्र में पहाड़ों की कटाई, अनियंत्रित खनन और पारिस्थितिकीय नुकसान को रोकने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अरावली जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता को लेकर कोई भी दूरगामी फैसला बिना विशेषज्ञों की राय के नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने पूर्व में (29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026 को) दिए अपने आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 3 अक्टूबर 2025 को सौंपी गई पुरानी कमेटी की रिपोर्ट की स्वतंत्र और निष्पक्ष वैज्ञानिक समीक्षा बेहद जरूरी है, ताकि कोई ऐसा कदम न उठ जाए जिसे बाद में सुधारना असंभव हो।
1- 500 मीटर की दूरी के नियम से संरक्षित क्षेत्र कम हो रहा है या नहीं, इसकी जांच करना।
2- यह पता लगाना कि क्या इस सीमित सीमांकन की वजह से गैर-अरावली क्षेत्रों में अनियंत्रित खनन को बढ़ावा मिल रहा है।
3- 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियां यदि 500 मीटर से अधिक की दूरी पर हैं तो क्या वे एक निरंतर पारिस्थितिकी संरचना का हिस्सा हैं।
4- राजस्थान में मौजूद 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 पहाड़ियां ही 100 मीटर की ऊंचाई के मानदंड को पूरा करती हैं, इस दावे की वैज्ञानिक और तथ्यात्मक जांच करना।
5- यह सुनिश्चित करना कि नई परिभाषा और सीमांकन से अरावली के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुंचे।
1- पदेन अध्यक्ष- महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद सदस्य।
2- डॉ. सुभाष आशुतोष (पूर्व महानिदेशक, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया)।
3- डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा (सेवानिवृत्त निदेशक, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया)।
4- बृज मोहन सिंह राठौर (पूर्व संयुक्त सचिव, वन मंत्रालय)।
5- प्रो. अशोक के. भटनागर (पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान, दिल्ली विवि)।
इनके अलावा, प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी (आइआइएचएस) और प्रो. (डॉ.) लक्ष्मीकांत शर्मा (सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा) को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। भारत सरकार के वन मंत्रालय के निदेशक स्तर के एक अधिकारी को सदस्य सचिव नियुक्त किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस नई कमेटी को यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि वह सभी प्रभावित वर्गों जैसे-पर्यावरणविदों, किसानों, खदान श्रमिकों और स्थानीय समुदायों से सुझाव आमंत्रित करने के लिए उचित सार्वजनिक सूचना जारी करे।
9 मई 2024 - सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली मामले की जांच के लिए प्रारंभिक समिति का गठन किया गया।
3 अक्टूबर 2025 - इस प्रारंभिक समिति ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी ।
20 नवंबर 2025 - सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया और कई दिशा-निर्देश जारी किए।
29 दिसंबर 2025 - सुप्रीम कोर्ट ने समिति की रिपोर्ट और दिशा-निर्देशों को लागू करने से पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र विशेषज्ञ राय लेने के लिए हाई-पावर कमेटी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
26 फरवरी 2026 - कोर्ट ने कमेटी के लिए डोमेन विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा।
25 मई 2026 - सुप्रीम कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 5 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी के गठन का वर्तमान आदेश पारित किया।
31 अगस्त 2026 - नवनियुक्त हाई-पावर कमेटी को विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपने की समय सीमा दी गई है।
07 सितंबर 2026 - सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।
Updated on:
4 Jun 2026, 12:13 PM IST
Published on:
4 Jun 2026, 12:13 PM IST
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