
उदयपुर में कोरोना से पहली मौत, 85 वर्षीय बुजुर्ग का छोटा बेटा ही कर सका अंतिम दर्शन
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. उदयपुर के 8-बड़ी माहेश्वरियों की सेहरी निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग की सोमवार सुबह एमबी हॉस्पिटल के कोरोना वार्ड में उपचार के दौरान मौत हो गई। अधीक्षक डॉ आरएल सुमन ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार अशोक नगर स्थित श्मशान घाट पर पूरी कोविड-19 गाइड लाइन के अनुसार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान केवल उनका छोटा बेटा पूरी एहतियात के साथ शामिल हुआ, जबकि अन्य परिजनों ने केवल मन से उन्हें विदाई दी।
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बुजुर्ग सहित आठ लोग पॉजिटिव अग्रवाल सहित उनके परिवार के आठ लोग कोरोना पॉजिटिव आए थे। अग्रवाल को 9 मई को एमबी में भर्ती किया गया था। इसके बाद उनके परिवार के लिए गए टेस्ट में से सात अन्य लोग दूसरे दिन यानी 10 मई को पॉजिटिव आ गए। मृतक को सीधे एमबी हॉस्पिटल में ही भर्ती किया गया था, जबकि अन्य लोगों को बेडवास स्थित जीबीएच जनरल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। मृतक अग्रवाल के बड़े बेटे ने पत्रिका को बताया कि वह स्वयं बेडवास में कोरोना पॉजिटिव वार्ड में भर्ती है, उनके साथ उनकी बेटी, उनकी मां, उनका नौकर, उनके छोटे भाई की पत्नी और उसकी बेटी भर्ती हैं जबकि उनका छोटा भाई एमबी के कोरोना वार्ड में भर्ती हैं।
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वेंटिलेटर पर लिया तो छोटे बेटे को यहां बुलाया: मृतक को 14 मई को तबीयत ज्यादा बिगडऩे पर वेंटिलेटर पर लिया था। इसके बाद बेडवास में भर्ती उनके छोटे बेटे को उनकी सार संभाल के लिए एमबी लाया गया था। उनके परिवार के अन्य लोग वहीं कोरोना वार्ड में भर्ती हैं।
- पॉजिटिव आने के करीब पांच दिन पहले उनका बड़ा बेटा अग्रवाल को एमबी हॉस्पिटल लेकर दिखाने पहुंचा था, लेकिन यहां पर जांच नहीं की गई, और केवल सर्दी, जुकाम की दवा देकर और स्क्रीनिंग कर भेज दिया गया। इसके बाद ठीक नहीं होने पर वे फिर से यहां आए तो उनकी जांच की गई थी।
- मृतक ने भर्ती होने के साथ ही करीब तीन दिन तक खाना नहीं खाया था।
- मृतक की मृत्यु के बाद उनके शव को मोर्चरी में ले जाकर कोविड गाइड लाइन के अनुसार कवर किया गया। इसके बाद दो स्वीपर को पीपीइ किट पहनाया गया, और बाद में अधिकारियों की देखरेख में दो एम्बुलेंस में अशोक नगर श्मशान ले जाया गया, वहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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हॉस्पिटल और बेटे का अलग-अलग मत - हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि मृतक को सीओपीडी की समस्या थी, जिससे उनके फेंफड़ों पर असर हो गया था, साथ ही मल्टी आर्गन फेलियर के कारण भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
- बड़े बेटे का कहना है कि उन्हें केवल विटामिन बी-12 का महीने में एक इंजेक्शन लगता था। उन्हें कोई समस्या या परेशानी नहीं थी। वह रोजना तीन किलोमीटर पैदल चलते थे, हमसे ज्यादा स्वस्थ थे।
Published on:
19 May 2020 07:21 am
