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इस गांव में समस्या जस की तस, भूल गए घोड़ी’मारीÓ

पीडब्ल्यूडी की उदासीनता से दुरस्त नहीं हुआ पुलिया, मानसून में एक बार फिर क्षेत्र का ४ गांवों से टूटेगा संपर्क
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udaipur

इस गांव में समस्या जस की तस, भूल गए घोड़ी'मारीÓ

उदयपुर/ फलासिया. बरसाती पानी के बहाव में हर बार बहने वाली घोड़ीमारी पुलिया की मरम्मत को लेकर स्थानीय लोक निर्माण विभाग की ओर से पूरे साल बरती गई लापरवाही अब ग्रामीणों के लिए चिंता की वजह बन गई है। आने वाले मानसून की पहली बरसात के साथ ही गांव का समीपवर्ती 4 गांवों से संपर्क टूट जाने की आशंकाएं गहराने लगी हैं। मानसून में राशन-पानी, आवागमन, स्कूली विद्यार्थियों की दिक्कतों को लेकर ग्रामीणों में चर्चा है। बावजूद इसके विभागीय प्रतिनिधियों की ओर से समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। गौरतलब है कि बीते 10 सालों के दौरान बरसाती पानी के बहाव में ये पुलिया करीब 8 बार टूट चुकी है। हकीकत को जानते हुए भी पुलिया के स्थायी समाधान को लेकर हर स्तर पर अनदेखी हो रही है।

इन गांवों से कटेगा संपर्क
पिछले मानसून में तेज बहाव के बीच ध्वस्त हुई पुलिया के समीप से ग्रामीणों ने फिलहाल विकल्प के तौर पर एक रास्ता बना रखा है। बरसात के साथ ही आमीवाड़ा, मुंडकोशिया, तुरगढ़ व तुरगढ़ का फला से जुड़े लोगों का मूल धारा से संपर्क कट जाएगा।

नहीं मिलती आपातकाल सेवाएं
दिक्कत पुलिया तक ही सीमित नहीं है। इस क्षेत्र के ग्रामीणों की स्थिति यह है कि लोगों को आवश्यकता के समय रोगी वाहन 104 व 108 जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पाती। प्रसूताओं और गंभीर रोगियों को खाट पर डालकर सड़क मार्ग तक लाया जाता है। पुलिया के अभाव में ग्रामीणों को आपात सेवा के लिए भी जोखिम उठाना पड़ सकता है।

नहीं मिली स्वीकृति
तख्मीना बनाकर भेजा था, पर स्वीकृति नहीं मिली। दुबारा तख्मीना भेजेंगे। अन्यथा सीधे निविदा कराएंगे। पानी का फ्लो ज्यादा होने से हर बार यह पुलिया टूट जाती है।
मोहम्मद यूनुस पिरजादा, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी झाड़ोल