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जनजाति आयुक्त कार्यालय तक का सफर पैदल पूरा करने की जिद ठानी

trible news भारतीय वन कानूनों में हो रहा विरोध
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जनजाति आयुक्त कार्यालय तक का सफर पैदल पूरा करने की जिद ठानी

जनजाति आयुक्त कार्यालय तक का सफर पैदल पूरा करने की जिद ठानी

उदयपुर/ कोटड़ा . trible news केंद्र सरकार द्वारा भारतीय वन कानून 1927 में संशोधन के लिए राज्य सरकारों को सुझाव के लिए भेजा गया है। इसे आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में पारित हो जाने से आदिवासियों के जीवन पर संकट आने वाला है। इसी के विरोध स्वरूप 17 नवम्बर को उदयपुर स्थित जनजाति आयुक्त के समक्ष प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को इसे तुरंत रोकने के लिए ज्ञापन भी दिया जाएगा। जंगल जमीन जन आंदोलन से जुड़े राजस्थान आदिवासी अधिकार मंच के संयोजक धरमचंद खैर ने बताया कि कोटड़ा, फलासिया और झाड़ोल के आदिवासी समुदाय का जीवन जंगलों पर आधारित है। ऐसे में बुधवार को क्षेत्र के 73 आदिवासी महिला-पुरुषों का दल गांधी ग्राउंड में एकत्रित हुआ। जहां से रैली के रूप में वे सभी उपखण्ड अधिकारी कार्यालय कोटड़ा पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बाद में यहीं से उदयपुर तक की पैदल यात्रा शुरू की। बता दें, यह दल पानरवा, झाड़ोल और पई होता हुआ 17 नवम्बर सुबह उदयपुर पहुंचेगा।

गांव-गांव बैठकें करते जाएंगे
उन्होंने बताया कि यह दल रास्ते में आने वाले सभी गांवों में बैठकें करते हुए ग्रामीणों से इस कानून के संशोधन के विरोध के लिए उदयपुर आने का आह्वान भी करेगा।

कानून में कैसे होंगे बदलाव
1. वन विभाग को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे वन रक्षा के नाम पर गोली चला सकेंगे।
2. वन विभाग के मुताबिक अगर गोली कानून के दायरे में चलाई है तो वनकर्मी पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी।
3. वन विभाग को यह अधिकार होगा किसी भी वन निवासी के परम्परागत वन अधिकारों को मुआवजा देकर खत्म किया जा सकेगा।
4. किसी भी वन निवासी को बगैर वारंट के गिरफ्तार किया जा सकेगा। उसके यहां छापा मार सकेंगे और उसकी सम्पति जब्त कर सकेंगे।
5. किसी भी वनकर्मी को दोषी पाये जाने पर उसके खिलाफ उच्चाधिकारी से स्वीकृति से ही केस दर्ज हो सकेगा।
6. उच्चतम न्यायालय में निरस्त याचकाओं के संबंध में अभी राजस्थान में हजारों प्रकरण लंबित पड़े हैं, जिनमें लीपा पोती की जा रही है।
7. trible news फुलवारी की नाल वन्यजीव अभ्यारण्य में अभी सामुदायिक अधिकार के 17 दावे प्रस्तुत किये गए हैं, लेकिन वन विभाग इसे निरस्त करने में लगा हुआ है।