VIDEO : घूसकांड खुला तो निकला व्यापारियों का गुबार

dhirendra joshi | Publish: Jun, 18 2019 06:29:07 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- उदयपुर आगार प्रबंधन को लिया घेरे में

धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के उदयपुर आगार में घूसकांड के मामले को लेकर पकड़े गए बुकिंग क्लर्क और फरार वित्त प्रबंधक का मामला प्रकाश में आने के बाद अब तक चुप्पी साधे लोग भी सामने आने लगे हैं। सोमवार को अनियमितताओं को लेकर रोडवेज बस स्टैंड व्यापार संघ के व्यापारी भी खुलकर सामने आए और यहां व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोली।

रोडवेज के उदयपुर आगार में भारी अनियमितताएं व्याप्त है। इसको लेकर कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आखिर अनियमितताओं की परत शनिवार को एसीबी की कार्रवाई में खुली। इसमें घूसकांड में लिप्त बुकिंग क्लर्क को रंगे हाथों पकड़ा गया और वित्त प्रबंधक अब तक फरार है। उदयपुर आगार में व्याप्त अनियमितताओं के समाचारों को राजस्थान पत्रिका ने भी प्रमुखता से उजागर किया, लेकिन इन पर भी लीपापोती कर दी गई।
इधर सोमवार को रोडवेज बस स्टैंड व्यापार संघ की ओर से मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, रोडवेज के प्रबंध निदेाशक को पत्र भेजा गया है। इसमें यहां व्याप्त अनियमितताओं की बिंदूवार जानकारी भी दी गई है।

यह बताई अनियमितताएं
- टेंडर समाप्त होने से तीन माह पूर्व निवादाएं आमंत्रित नहीं की जा रही।

- टेंडर फार्म में अधिकारियों द्वारा मनमर्जी से अनुमानित और धरोहर राशि लिखी जा रही है।
- उच्चतम निविदा आने पर भी आवंटन कमेटी द्वारा निरस्त कर दिया जाता है।

- उदयपुर आगार की १७ दुकानों का समय पर टेंडर नहीं होने से रोडवेज का लाखों रुपए का नुकसान हुआ।
- टेंडर प्रक्रिया में चहेते व्यवसायियों को २० प्रतिशत राशि कम कर टेंडर दिया गया और अन्य को नहीं दिया गया।

- व्यापारियों से सुलभ के पास व्यवस्थित दुकानें बनवाई गई, नगर निगम और रोडवेज प्रबंधन के बीच मनमुटाव होने से दुकानें टूटी इसका खामियाजा भी व्यापारियों का भुगतना पड़ा।
- बिना नोटिस दिए दुकानों को ताले लगाकर बंद कर दिया जाता है और बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है।

- दो वर्ष में जारी की गई निविदाओं की जांच की जाएं।

यहां भी हो सकती है अनियमिताएं

उदयपुर आगार में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर समय-समय पर समाचार भी प्रकाशित होते रहे हैं। लेकिन सक्षम अधिकारी द्वारा इन पर कार्रवाई नहीं की गई। एेसे में यहां लगातार अनियमितताएं बढ़ती ही जा रही है। राजस्थान पत्रिका ने करीब चार माह पूर्व बिना किराये के चल रहे सुलभ कॉम्पलेक्स का समाचार प्रकाशित किया था। इसके साथ ही बसों के चालकों और परिचालकों को धमकाने, उनसे राशि वसूली करने के आरोप भी नियमित रूप से लगते रहते हैं। लेकिन इन आरोपों को लेकर अधिकारी गंभीर नजर नहीं आते।

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