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राजस्थान के इस शहर में माटी की सौंधी गंध के आगे फ्रीज और कैम्पर फीके

फ्रिज वाले घरों में आ रही माटी की बोटल्स और कैम्पर
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udaipurites like to purchase clay pots in summer season

राजस्थान के इस शहर में माटी की सौंधी गंध के आगे फ्रीज और कैम्पर फीके

उदयपुर. शायद आपको वह दौर तो याद ही होगा जब घरों में एक पण्डेर हुआ करती थी और वहां पर मटका रखा जाता था और उसके चारों ओर कपड़ा भीगो कर रख दिया जाता था ताकि गर्मी के दिनों में ताजा और ठंडा पानी मिल सके । यह हमारी परम्परा का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन जब से फ्रिज और आरओ का प्रचलन बढ़ा है तब से कुछ घरों को छोडक़र अधिकांश घरों से पण्डेर और वहां से मटके दूर हो गए है। फिर भी सबके बीच अच्छी बात यह है कि अब भी कुछ लोग है जो परम्परा को जीवित रखे हुए है। शहर में विभिन्न स्थलों पर बिकने वाले मिट्टी के मटके, बोतल्स और कैम्पर बताते है कि शहर लोगों के लोगों के बीच आज भी मटके और मिट्टी के बर्तन में रखे पानी का स्वाद जिंदा है।

मॉडर्न हो गए मटके, कैम्पर जैसा लुक
आधुनिक होती हर चीज के बीच जब मटका पिछडऩे लगा तो कुम्हारों ने भी आधुनिकता की राह पकड़ी। मिट्टी के बर्तन विक्रेता बताते हैं कि मिट्टी के बर्तनों के प्रति नई पीढ़ी का जुड़ाव हो इसके लिए मटके भी मॉडर्न बनाए जा रहे है। उन पर विशेष डिजाइन कर गोल के अलावा अन्य आकर्षक डिजाइन में भी ढाला जा रहा है। प्लास्टिक कैम्पर से जुड़ चुके लोगों को कैम्पर जैसा अनुभव कराने के लिए मटके को कैम्पर का लुक देकर उस पर नल लगाया जा रहा है। इनकी कीमत सौ से 300 रुपए तक है जो मटके के आकार और डिजाइन पर निर्भर करता है।


आकर्षक डिजाइन, जैसे प्लास्टिक ही हो
मिट्टी के बर्तन बताने समय नई पीढ़ी की पसंद का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बर्तनों को इतनी कुशलता से तैयार किया जा रहा है कि दूर से देखें तो मिट्टी की बॉटल्स भी प्लास्टिक जैसी नजर आ रही है। इन बॉटल्स का आकर्षण बढ़ाने के लिए इनमें हैड पेटिंग भी की गई है। विक्रेताओं के अनुसार इनकी कीमत सौ से दो सौ रुपए तक है। इसके अलावा मिट्टी के मग, छोटी टंकी भी बाजार में आने लगे हैं। जिसे भी खूब पसंद किया जा रहा है।

इको फ्रैंडली, पानी का स्वाद अच्छा
मटके के पानी का स्वाद मीठा होता है, साथ ही यह इको फ्रैंडली भी है व परम्पराओं से भी जुड़ा रखता है। गांव में मटके का ही पानी पीते थे तो उसी की आदत पड़ी हुई है। इसलिए कमरे पर मटका ही रखा है उसी का पानी पीते है। - मीनाक्षी टेलर