
जमीन सड़क किनारे की गई।
उदयपुर. वल्लभनगर क्षेत्र में नए सेटलमेंट की त्रुटि सुधारने के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में है। वल्लभनगर-सालेरा कलां मार्ग पर राणाकुई क्षेत्र में एक महिला खातेदार की जमीन की कमी-पूर्ति के लिए पटवारी ने सड़क किनारे स्थित बिलानाम जमीन उसके नाम कर दी। बदले में खातेदार की निजी जमीन बिलानाम की।
रिपोर्ट के मुताबिक गोटीपा निवासी रमा देवल ने 4 मई 2023 को उपखंड अधिकारी वल्लभनगर की अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया था। इसमें नवीन सेटलमेंट के दौरान पुरानी आराजी का क्षेत्रफल कम होने की बात कहते हुए कमी की पूर्ति का अनुरोध किया गया। 13 मई को तहसीलदार ने पटवारी को रिपोर्ट के लिए निर्देश दिए। पटवारी ने 15 मई को मौका पर्चा और रिपोर्ट तैयार की और 16 मई को तहसीलदार के समक्ष रिपोर्ट पेश कर दी। इसी दिन तहसीलदार ने जवाब तैयार करके एसडीओ को भेज दिया। इसके बाद 23 मई को एसडीओ ने प्रकरण का निस्तारण कर 0.1050 हेक्टेयर जमीन की पूर्ति कर दी। जब कमी 0.1050 ही थी तो 0.4800 की पूर्ति क्यों की गई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
तीन आराजी में दर्ज थी जमीन
पुराने रिकॉर्ड में रमा देवल के नाम आराजी 14/2 में 4 बीघा 5 बिस्वा, 16/4 में 3 बीघा 15 बिस्वा और 12/1 में 1 बीघा अनुसार कुल 9 बीघा जमीन अलग-अलग जगह थी। नए सेटलमेंट में संबंधित आराजी को 1263, 1264, 1265 और 1266 में बदला। रिकॉर्ड में 1.8200 हेक्टेयर जमीन दर्ज की, जबकि 1.9250 हेक्टेयर होनी थी।
जमीन की कीमत एक करोड़
पटवारी रिपोर्ट में 0.1050 हेक्टेयर की कमी पूर्ति के लिए आराजी 1252, 1253 और 1255 की 0.4800 हेक्टेयर बिलानाम जमीन खातेदार के नाम करने की रिपोर्ट बनी। यह जमीन वल्लभनगर-सालेरा मार्ग से सटी है, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपए है। इसके बदले खातेदार की आराजी 1266 में दर्ज 0.3750 हेक्टेयर जमीन बिलानाम की गई है।
नए रिकॉर्ड में एक चक हो गई जमीन
मामले में सवाल यह भी है कि खातेदार के प्रार्थना पत्र में स्पष्ट नहीं किया गया था कि पुराने किस आराजी नंबर के मुकाबले नए रिकॉर्ड में क्षेत्रफल कम हुआ। पुराने रिकॉर्ड में तीनों आराजियां अलग-अलग स्थानों पर थीं, जबकि पटवारी रिपोर्ट में सुधार इस तरह किया गया कि नए रिकॉर्ड में जमीन एक चक होकर सड़क किनारे आ जाए।
नए सेटलमेंट में 60-70 फीसदी अशुद्धियां
वल्लभनगर तहसील में 2006-07 में सर्वे के बाद 2021 में नवीन सेटलमेंट लागू किया गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक नए और पुराने रिकॉर्ड में 60 से 70 प्रतिशत तक अशुद्धियां होना सामने आया है। दुरुस्त कराने के लिए कई काश्तकार तहसीलदार और उपखंड मजिस्ट्रेट की अदालतों में वाद दायर कर चुके हैं, जिनमें कई मामले लंबित हैं।
पटवारी शहजाद खां से चार सवाल....
सवाल: सेटलमेंट संबंधी दिक्कतों के समाधान के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी?
जवाब: वल्लभनगर क्षेत्र में सेटलमेंट संबंधी दिक्कतों को लेकर तत्कालीन कलक्टर ने शुद्धि के आदेश दिए थे। ऐसे में शिविर लगाकर कई मामलों का समाधान किया गया।
सवाल: क्या 20 दिन में ही जमाबंदी में सुधार किया जा सकता था?
जवाब: आदेश के अनुसार आवेदन नहीं होने पर भी स्वसंज्ञान लेकर शिविर में जमाबंदियों का मिलान करने और प्रकरणों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे।
सवाल: पटवारी रिपोर्ट क्या थी और अंतिम निर्णय बिना देखे कैसे हुआ?
जवाब: आवेदन पर रिपोर्ट करना पटवारी का काम है, जबकि प्रकरण में निर्णय तहसीलदार और एसडीएम कोर्ट के स्तर पर होता है।
सवाल: यदि पटवारी रिपोर्ट और निर्णय पर आपत्ति हो तो क्या करेंगे?
जवाब: अगर कोई निर्णय से असंतुष्ट है तो अपील की जा सकती है। सक्षम न्यायालय के आदेश पर पूर्व में किया गया निर्णय खारिज होना भी संभव है।
Updated on:
25 Aug 2026 06:19 pm
Published on:
25 Aug 2026 06:19 pm
