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VIDEO: देवर्षि नारद जयंती पर पत्रकारों का सम्मान, पत्रकारिता से जुड़ी इन बातों से किया सभी को रू-ब-रू

उदयपुर. देवर्षि नारद सिर्फ व्यक्ति नहीं, बल्कि संवाद की पूरी संस्था थे।
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 6 May 2018, 3:27 PM IST

Honor of Journalists on Devshi Narada Jayanti

उदयपुर . देवर्षि नारद सिर्फ व्यक्ति नहीं, बल्कि संवाद की पूरी संस्था थे। वे घटनाओं के समाचारों के संवाहक थे। समाचारों का संबंधित पक्ष के समक्ष प्रस्तुतीकरण सकारात्मक रहता था न कि विचारों से प्रभावित, यही कारण है कि किसी एक विशेष लोक नहीं अपितु तीनों लोकों में उनकी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता थी। आज की पत्रकारिता में इसी विश्वसनीयता पर बहस छिड़ी है।


यह बात शनिवार को आद्य संवाददाता देवर्षि नारद जयंती व पत्रकार सम्मान समारोह पर विश्व संवाद केन्द्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आर्गेनाइजर पत्रिका के सम्पादक प्रफुल्ल केतकर ने कही। राजस्थान साहित्य अकादमी के एकात्म सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को नारद जी के तीन सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत बताई।

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पहला टेबल स्टोरी नहीं बल्कि फील्ड में जाकर खुद देखो। दूसरा अपने सूत्र यानी सोर्स को कभी ओपन मत करो और तीसरा यह कि हर खबर हर किसी के लिए नहीं होती, समाचार को उचित तरीके से उचित स्थान पर और जरूरत होने पर ही प्रेषित करें।


विशिष्ट अतिथि राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने कहा कि देवर्षि नारद को रजत पट पर उपहासात्मक चरित्र के रूप में दिखाया गया जो कदाचित सत्य नहीं है। अध्यक्षता उद्यमी जितेन्द्र कुमार तायलिया ने की।

इस मौके पर पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले राजस्थान पत्रिका के धीरेन्द्र कुमार जोशी सहित तीन पत्रकारों का सम्मान किया गया। विश्व संवाद केन्द्र के प्रभारी कमल रोहिल्ला ने केंद्र की गतिविधियों की जानकारी दी। सम्मानित होने वाले पत्रकारों का परिचय भारतभूषण ओझा व मनोज जोशी ने करवाया।

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उदयपुर. पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा के पुत्र दिलीप सुखाडिय़ा का दिल का दौरा पडऩे से शनिवार को निधन हो गया। वे यहां शोभागपुरा स्थित फोर्टिस अस्?पताल में एक सप्?ताह से भर्ती थे। दिलीप सुखाडिय़ा के परिवार में पत्नी नीलिमा सुखाडिय़ा उनकी एक पुत्री है। अन्तिम यात्रा 6 मई रविवार सुबह 11 बजे दुर्गानर्सरी रोड स्थित उनके निवास आशीर्वाद हाउस से प्रारम्भ होकर अशोकनगर स्थित श्मशान घाट पहुंचेगी। 68 वर्षीय सुखाडिय़ा राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे लेकिन उन्होंने पत्नी नीलिमा सुखाडिय़ा को महापौर का चुनाव लड़ाया था। उनके निधन की सूचना पर कांग्रेसियों में शोक की लहर छा गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट , कांग्रेस महासचिव डॉ सीपी जोशी, पूर्व मंत्री गिरिजा व्यास, कांग्रेस शहर गोपालकृष्ण शर्मा सहित कई नेताओं ने
शोक जताया।