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उदयपुर में पानी फिर बरपाएगा कहर: आयड़ नदी पर बरपा बाढ़ का खतरा, 60-70 मकान डूब एरिया में

उदयपुर की जीवनरेखा आयड़ नदी का गला घोंटा जा रहा है। 102 मीटर चौड़ी नदी को रिकॉर्ड में 50-55 मीटर दिखाया गया, मौके पर मात्र 37 मीटर बची। रसूखदारों के कब्जे से नदी सिकुड़ रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं, कब्जे नहीं हटे तो बाढ़ का खतरा मंडराएगा। पढ़ें मोहम्मद इलियास की रिपोर्ट...

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Udaipur

किसने घोंटा आयड़ का गला (फोटो- पत्रिका)

उदयपुर: देखो हाकम और विधायक जी! कैसे-कैसे किस-किस ने आयड़ नदी का गला घोंटा। वर्ष 1990 में 102 मीटर चौड़ी आयड़ नदी सरकारी कागजों में मात्र 50-55 मीटर रह गई और अब कई जगह 35-40 मीटर में सिमट गई। जहां छोटी हुई वो सब इलाका पॉश और रसूखदारों नवरत्न कॉम्पलेक्स व भूपालपुरा का है। इन रसूखदारों ने आयड़ नदी किनारे पेटे में कब्जा कर किसी ने रिटर्निंग वॉल बना दी तो किसी ने निर्माण कर इमारत खड़ी कर दी।


नदी में इतना अतिक्रमण होने के बावजूद वोट की राजनीति में किसी ने इन पर बुलडोजर नहीं चलाया। अधिकारियों ने कार्रवाई की बजाय उन्हें नदी पेटे में पट्टा दे दिया। रही कसर प्रशासन और स्मार्ट सिटी ने पूरी कर दी। अतिक्रमण उजागर होने के बावजूद कार्रवाई के बजाय आगे से निर्माण कर अतिक्रमियों को शह दे दी। अब जब आयड़ नदी ने अपनी प्राकृतिक सीमा में बहते हुए रौद्र रूप दिखाया तो सबकी आंखें खुलकर बाहर आ गई।


60-70 मकान डूब क्षेत्र में, सिर्फ गरीबों पर चलाया डंडा


स्मार्ट सिटी की ओर से 5 किलोमीटर क्षेत्र में नदी को संवारने पर 75 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इस बार भारी बारिश के कारण अर्सें बाद आयड़ के पूरी वेग में बहने पर इस क्षेत्र में करीब 60 से 70 मकानों में पानी में भर गया तो कई लोगों को भारी नुकसान हो गया।


सर्वाधिक गड़बड़ी नदी के छोटे वाले स्थान नवरत्न कॉम्प्लेक्स पुलिया के आगे व भूपालपुरा क्षेत्र में की गई। हैरत की बात यह है कि इन गड़बड़ियों वाले इलाके को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने नजरअंदाज कर सुभाषनगर क्षेत्र में गरीबों पर डंडा चल दिया। वह क्षेत्र तो सुरक्षित है, नुकसान सिर्फ रसूखदारों के कब्जे वाले इलाकों में हुआ।


देखिए कहां, कितनी छोटी हुई नदी


शहर में आयड़ नदी का उद्गम स्थल मदार चिकलवास फीडर से उदयसागर तक था। सरकारी कागजों में 102 मीटर थी, उसे अभी 50-55 मीटर बताया गया।


यहां इतनी कम हुई


-पुला में 49 मीटर।
-कृष्णपुरा कॉजवे में 37 मीटर।
-भूपालपुरा में 47 मीटर।
-अशोक नगर श्मशान में 40 मीटर।
-अशोक नगर एनिकट में 52 मीटर।
-लेकसिटी मॉल में 59 मीटर।
-पुराना पासपोर्ट ऑफिस में 59 मीटर।
-सुभाष नगर में 54 मीटर।


नदी का इतिहास और लेखा-जोखा


-26 किलोमीटर उदयपुर क्षेत्र में है आयड़ नदी की लंबाई।
-5 किलोमीटर क्षेत्र नदी को स्मार्ट सिटी ने संवारा।
-75 करोड़ रुपए खर्च किए नदी को संवारने में।
-5 किलोमीटर क्षेत्र में जहां नदी संवरी वहीं छोटी हुई।
-1990 में औसत 102 मीटर चौड़ी थी नदी।
-50-55 मीटर औसत रह गई कई जगह पर।
-37 मीटर सबसे कम चौड़ी वाली जगह है अभी।
-60-70 मकान 5 किमी. के दायरे में आए डूब क्षेत्र में।
-9 गांव को उदयसागर के बैकवाटर ने कर दिया तरबतर।


आयड़ नदी किनारे जलभराव


बरसात के बाद आयड़ किनारे बसी कॉलोनियों में जलभराव और कीचड़ से लोग परेशान हो गए। हालात बिगड़ते देख सोमवार को नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना और यूडी आयुक्त राहुल जैन ने मौके पर पहुंचकर सफाई और राहत कार्यों की कमान संभाली। दोनों आयुक्तों ने अग्निशमन वाहनों से गलियों में जमी गंदगी साफ करवाई और कर्मचारियों को तुरंत व्यवस्था करने के निर्देश दिए।


निरीक्षण के दौरान निगम अधीक्षण अभियंता मुकेश पुजारी, यूडीए अधिशासी अभियंता नीरज माथुर और स्वास्थ्य निरीक्षक नरेंद्र श्रीमाली मौजूद रहे। आयुक्त खन्ना ने बताया कि कलेक्टर नमित मेहता के निर्देश पर निगम, यूडीए संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य करने का अभियान चलाया है।


करजाली हाउस और नवरत्न कॉम्प्लेक्स में कराई सफाई


पुला स्थित आलू फैक्ट्री और करजाली कॉम्प्लेक्स में जलभराव के बाद गलियों में कीचड़ जमा होने पर आयुक्त खन्ना ने मौके पर खड़े रहकर फायर वाहनों और बॉबकैट मशीन से सफाई करवाई। वहीं, नवरत्न कॉम्प्लेक्स में टूटी रोड जालियों और गड्ढों की मरम्मत जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही अशोक नगर मोक्षधाम और आयड़ श्मशान में लगातार दो दिन सफाई कर परिसर को व्यवस्थित किया।


साढ़े चार-पांच हजार साल पुरानी सभ्यता की साक्षी आयड़ नदी, बेड़च, बनास और चंबल होते हुए गंगा तक पहुंचती है, आज वह खुद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उत्तर, दक्षिण और पश्चिम के पहाड़ों से आने वाला बरसाती पानी इस नदी में मिलता है और यही नदी उदयपुर के भूजल और झीलों की रीढ़ रही है। लेकिन कथित विकास, अतिक्रमण और लापरवाही ने इसे एक नाले में बदल दिया है।
-जिज्ञासा परमार, आयड़ नदी पर शोधार्थी


साढ़े नदी को उसके मूल स्वरूप में वापस नहीं लाया गया, अतिक्रमण नहीं हटा तो आयड़ स्वयं अपने अस्तित्व को पाने के लिए हमें गंभीर दंड देगी। अभी नदी की चौड़ाई असल क्षमता से आधी से भी कम है। आयड़ का तल भी कृत्रिम रूप से समतल कर पत्थर की फर्शी डाल दी गई है, जिससे पानी की रफ्तार तेज हो गई और किनारों पर कटाव बढ़ गया। अतिक्रमण ने भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
-डॉ. अनिल मेहता, झील विशेषज्ञ