
उज्जैन. मंगलवार को देव शयनी एकादशी का व्रत रहेगा। इस दिन से आने वाले चार मास तक सृष्टि का भार भगवान शिव के हाथ रहेगा, भगवान विष्णु शयनकाल में समय व्यतीत करेंगे। इन दिनों मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी, वहीं चातुर्मास भी आरंभ हो जाएंगे। भगवान विष्णु पूरी सृष्टि का संचालन भगवान शिव को सौंपकर स्वयं क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाएंगे। इसके बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि अर्थात देवउठनी ग्यारस को भगवान विष्णु पुन: जागते हैं।
हिंदू धर्म में चातुर्मास के आरंभ के साथ ही शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हर वर्ष चतुर्मास, आषाढ़ के शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी से शुरू होते हैं और देवउठनी एकादशी तक रहते हैं। इस साल चातुर्मास 20 जुलाई से शुरू होकर 14 नवंबर तक चलेंगे।
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राजा बली के यहां रहेंगे भगवान विष्णु
पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु पाताल लोक में देवउठनी एकादशी तक के लिए राजा बली के यहां चले जाते हैं। इस दौरान संसार की देखरेख भगवान शिव के हाथों में होती है। शादी-विवाह और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। बाकी अन्य कार्य जैसे- मकान बनवाना, गृह प्रवेश, नए व्यापार का शुभारंभ आदि किया जा सकता है। देवशयनी एकादशी का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
ज्योतिषविदों के मुताबिक इन 4 महीनों के दौरान जगत की देखरेख भगवान शिव करेंगे। वहीं विवाह, दीक्षा ग्रहण, गृहप्रवेश, यज्ञ, यज्ञोपवीत संस्कार जैसे शुभ कार्य चार महीनों के लिए पूर्णत: वर्जित रहेंगे। 20 जुलाई 14 नवंबर तक भगवान विष्णु 117 दिन सोएंगे। तिथियों की घटत-बढ़त के कारण चंद्रमा के तेज गति से तिथियों का क्षय होने से पूरे चार महीने नहीं होकर इसमें तीन दिन कम हो रहे हैं।
Published on:
20 Jul 2021 08:24 am
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