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उज्जैन. विधानसभा चुनाव में पार्टी या प्रत्याशी की ओर से बल्क एसएमएस भेजने के लिए भी मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनीटरिंग कमेटी से अनुमति लेना होगी। यह अनुमति टेलीकॉम कंपनी को लेना होगी। एेसा नहीं करने पर संंबंधित टेलीकॉम कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार को बृहस्पति भवन में जिला स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) और पेड न्यूज पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बैठक में कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि टेलीकॉम कंपनियों को निर्वाचन के दौरान बल्क एसएमएस भेजने के पूर्व एमसीएमसी से अनुमति अनिवार्य रूप से लेना होगी। उन्होंने जिले में संचालित अन्य निजी टेलीकॉम कंपनियों को भी इस संबंध में सूचना देने और अगली बैठक में उनके प्रतिनिधियों को बुलाने का कहा। कलेक्टर ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन प्रसारित करने के पूर्व प्री-सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा। किसी अभ्यर्थी की लिखित अनुमति के बिना यदि सोशल मीडिया पर उसका प्रचार-प्रसार किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है तो संबंधित के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। अभ्यर्थी यदि किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कार्यक्रम के मंच से किसी भी तरह का राजनीतिक प्रचार-प्रसार नहीं किया जाए। यह निर्वाचन अपराध की श्रेणी में आएगा और कार्यक्रम के आयोजक के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की जाएगी। किसी अभ्यर्थी द्वारा स्थानीय चैनल को यदि बाइट दी जा रही है तो उसकी भी निगरानी की जाएगी। बाइट के दौरान शब्दों पर निर्भर करेगा कि आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। बैठक में समिति अध्यक्ष सिंह के अलावा, अपर कलेक्टर व नोडल अधिकारी दीपक आर्य, सचिव प्रभारी संयुक्त संचालक जनसंपर्क पंकज मित्तल, आरसी मित्तल, डॉ.स्वामीनाथ पाण्डेय, विशाल हाड़ा, पंकज उपाध्याय, संदीप कुलश्रेष्ठ, लक्ष्मण पटेल, संदीप मेहता, आनन्द निगम, अविनाश चतुर्वेदी मौजूद थे।
बैठक में यह भी
- चुनाव आयोग में पंजीकृत राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पार्टी के उम्मीदवार विज्ञापन जारी करने के तीन दिन पूर्व व अपंजीकृत राजनीतिक दल के उम्मीदवार 7 दिन पूर्व अपना आवेदन एमसीएमसी को प्रस्तुत करेंगे।
- व्यय अधिकारी एमसीएमसी की अतिरिक्त शाखा के रूप में कार्य करेंगे। निर्वाचन के दौरान होने वाले व्यय का संधारण करेंगे।
- कमेटी सचिव मित्तल ने पॉवर पाइन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से एमसीएससी की जानकारी दी।
- पेड न्यूज की निगरानी के लिए जनसम्पर्क कार्यालय में मीडिया निगरानी सेल भी बनाया जा रहा है।
- पेड न्यूज को प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया द्वारा परिभाषित करते हुए बताया गया कि ऐसा समाचार या विश्?लेषण जो प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पैसे देकर या वस्तु देकर छपवाया गया हो को पेड न्यूज माना जाएगा।
- पेड न्यूज को लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत निर्वाचन अपराध के रूप में दर्ज किया जाएगा।
- पेड न्यूज को रोकने के लिए वर्तमान तंत्र के माध्यम से पेड न्यूज छपवाने के व्यय की गणना कर उसे संबंधित उम्मीदवार के निर्वाचन व्यय में जोड़ा जाएगा।
- सोशल मीडिया वेबसाइट्स जिनको कि आयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रूप में परिभाषित किया गया है, पर भी मीडिया सर्टिफिकेशन का नियम लागू होगा।
यह करेगी एमसीएमसी कमेटी
- जिला स्तरीय एमसीएमसी द्वारा प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित या प्रसारित होने वाली पेड न्यूज का चिन्हांकन कर उक्त पेड न्यूज के व्यय की गणना डीएवीपी, डीपीआर दरों के आधार पर कर मूल्य निर्धारण किया जाएगा।
- पेड न्यूज का मूल्य संबंधित उम्मीदवार के निर्वाचन व्यय में जोडऩे के लिए संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को भेजा जाएगा।
- इस नोटिस की एक प्रति व्यय प्रेक्षक को भी भेजी जाएगी।
- जिला स्तरीय एमसीएमसी के पत्र के आधार पर संबंधित रिटर्निंग अधिकारी पेड न्यूज के प्रकाशन या प्रसारण के 96 घंटे के भीतर संबंधित उम्मीदवार को राशि खर्च में जोडऩे संबंधित नोटिस जारी करेगा।
- उम्मीदवार नोटिस प्राप्ति के 48 घंटे के बाद भी यदि जवाब प्रस्तुत नहीं करता है तो एमसीएमसी का निर्णय अंतिम माना जाएगा।
- जिला स्तरीय एमसीएमसी का निर्णय यदि उम्मीदवार को अमान्य हो तो वह 48 घंटे के भीतर राज्य स्तरीय एमसीएमसी को अपील कर सकेगा।
Published on:
10 Oct 2018 06:00 am
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