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शाजापुर. बोलचाल की भाषा में तो हिंदी का उपयोग सामान्य रूप से किया जा रहा है, लेकिन स्कूलों में हिंदी को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसा हम नहीं बल्कि शासन स्तर से कहा जा रहा है। यही कारण है कि शासकीय माध्यमिक विद्यालयों में यदि विद्यार्थियों की संख्या 175 से ज्यादा रहती है तो ही वहां पर हिंदी विषय के लिए शिक्षक पदस्थ किए जाते है, यदि इससे कम संख्या है तो वहां पर हिंदी को छोडकऱ अन्य विषयों के शिक्षक पदस्थ रहते है। ऐसे में हिंदी भाषी प्रदेश में ही हिंदी की अवहेलना होती दिखाई दे रही है।
जिले में शासकीय प्राथमिक विद्यालय 815 और माध्यमिक विद्यालय 438 है। इन स्कूलों में अध्ययन करने वाले अधिकांश विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हिंदी विषय के शिक्षक नहीं है। अन्य विषयों के शिक्षक ही हिंदी विषय का अध्यापन कराते है। जानकारी लेने पर पता लगा कि शासन स्तर से ही हिंदी विषय के शिक्षकों के पद को छात्र संख्या बढऩे पर रखा गया है, अब जबकि जिले के कुछेक विद्यालयों में ही छात्र संख्या 175 से ज्यादा है इस कारण से इन्हीं विद्यालयों में हिंदी विषय के स्नातक शिक्षक सामाजिक विज्ञान के साथ-साथ हिंदी का भी अध्यापन कराते है। यदि इससे कम छात्र संख्या रहती है तो वहां पर अन्य दूसरे विषयों के शिक्षक विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ाते है। लंबे समय से यही प्रणाली शिक्षा विभाग में लागू है।
फैक्ट फाइल
जिले के प्राथमिक स्कूल 815
जिले के माध्यमिक स्कूल 438
प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी 30331
माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी 22188
प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थ शिक्षक 2214
प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थ प्रधानाध्यापक 1008
(स्रोत : डीपीसी और डीइओ कार्यालय-शाजापुर)
इस तरह होते पदस्थ
शासन के नियमानुसार प्राथमिक शालाओं में न्यूनतम दो शिक्षक पदस्थ रहते है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 60 से ज्यादा होने पर तीसरे शिक्षक की पदस्थपना की जाती है। प्रक्रिया के तहत प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक को बढ़ाया जाता है। विद्यार्थियों की संख्या 150 होने पर इन शालाओं में प्रधानाध्यापक पदस्थ किए जाते हैं। इसी तरह माध्यमिक विद्यालयों में न्यूनतम 3 शिक्षक पदस्थ रहते है। ये शिक्षक गणित, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान विषय के होते है। विद्यार्थियों की संख्या 105 तक रहने पर तीन शिक्षक होते है। इसके बाद प्रत्येक 35 विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर एक-एक शिक्षक और पदस्थ किए जाते है। ऐसे में जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 105 से 140 के बीच होती है वहां पर चौथे शिक्षक का पद संस्कृत विषय के लिए रहता है। विद्यार्थियों की संख्या 175 तक होने पर पांचवे शिक्षक के रूप में विज्ञान विषय के शिक्षक को पदस्थ किया जाता है। 175 से ज्यादा विद्यार्थियों की संख्या होने पर हिंदी विषय में स्नातक सामाजिक विज्ञान के शिक्षक को हिंदी अध्यापन कराने के लिए पदस्थ किया जाता है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत माध्यमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के आधार पर हिंदी के लिए 6 नंबर पर ही शिक्षक पदस्थ होता है। वैसे जो शिक्षक संस्कृत और अंग्रेजी पढ़ाते है उन्हीं से उम्मीद की जाती है कि वो हिंदी भी पढ़ा देंगे। हालांकि हिंदी विषय के लिए भी सभी जगह शिक्षक होना चाहिए।
राजेंद्र शिप्रे, प्रभारी डीपीसी-शाजापुर
Published on:
27 Jul 2019 08:02 am
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