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MP Election 2023 : सरकार बनाने में पुरुषों के बराबर महिलाएं, चलाने में न के बराबर ही मिला मौका

महिलाएं सरकार तो बना देंगी लेकिन सरकार चलाने के लिए इस बार भी इन्हें मौका न के बराबर ही मिल रहा है। जिले में ही सात में से महज एक सीट पर एक महिला प्रत्याशी को मौका मिला है।

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Reservation for Women in Politics

जिले में 19.46 फीसदी महिला प्रत्याशी, कांग्रेस ने सात में से सिर्फ एक सीट पर टिकट दिया, भाजपा ने यह पहल भी नहीं की उज्जैन. जिले में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग पुरुष मतदाता के बराबर हो गई है। मतलब साफ है नारी शक्ति की मत शक्ति निर्णायक होगी। महिलाएं सरकार तो बना देंगी लेकिन सरकार चलाने के लिए इस बार भी इन्हें मौका न के बराबर ही मिल रहा है। जिले में ही सात में से महज एक सीट पर एक महिला प्रत्याशी को मौका मिला है।

राजनीतिक दलों को प्रदेश में सरकार बनाने के लिए महिलाओं में विजयश्री का मंत्र नजर आ रहा है। चुनाव पूर्व भाजपा लाडली बहना योजना लागू कर चुकी है तो कांग्रेस महिला सम्मान निधि की घोषणा। ऐसे में दोनों ही दल महिला मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरित सत्ता दोनों ही दलों ने महिलाओं के लिए सत्ता में कुर्सियां खाली नहीं की है। अधिकांश कुर्सियों पर पुरुषों को ही बिठाया गया है। कांग्रेस ने प्रदेश में कुल 230 सीट में से 29 तो, भाजपा ने 28 सीट पर ही महिलाओं को टिकट दिया है। जिले में भी सात में से सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस की एक ही महिला प्रत्याशी चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने तो जिले में एक भी सीट पर महिला को मौका नहीं दिया है। प्रदेश और जिले की यह स्थिति तब देश में महिलाओं को चुनाव में 33 फीसदी आरक्षण देने के कदम उठाए जा रहे हैं।

33 साल में सर्वाधिक हुई महिला मतदाताओं की संख्या

इस बार के चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण रहेगी। प्रदेश में महिला मतदाताओं का प्रतिशत 84.57 फीसदी है। 33 साल में यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पूर्व 1985 के विधानसभा चुनाव में 49.23 प्रतिशत महिला मतदाता थीं।

मतदाताओं की स्थिति

जिले में मतदाता: 1536756

महिला: 760189

महिला मतदाता प्रतिशत: 49.46

पुरुष: 77495

पुरुष मतदाता प्रतिशत: 50.52

थर्ड जेंडर मतदाता: 72

थर्ड जेंडर मतदाता प्रतिशत: 0.004

प्रदेश में महिला मतदाता की हिस्सेदारी

वर्ष - महिला मतदाता

- 2023- 48.57

- 2018 - 47.80

- 2013 47.33

- 2008 47.24

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वर्ष महिला मतदाता

- 2003 47.82

- 1998. 48.19

- 1993 48.50

- 1990 48.46

- 1985 49.23

भाजपा सिर्फ बात करती है, कांग्रेस नेतृत्व देती है

- प्रदेश हो या जिला, कांग्रेस ने महिलाओं को भाजपा से ज्यादा टिकट दिए हैं। जिले में भाजपा ने एक भी सीट पर महिला को अवसर नहीं दिया जबकि उज्जैन उत्तर में कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी चुनाव में उतारे है। भाजपा सिर्फ नारी सम्मान की बात करती है, उन्हें उनका अधिकार नहीं देती। पंचायत राज में भी कांग्रेस ने ही महिलाओं का नेतृत्व बढ़ाया था।

- कमल पटेल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष

भाजपा महिला सशक्तिकरण को कटिबद्ध

आज देश की राष्ट्रपति एक महिला है। उज्जैन जिला पंचायत में अध्यक्ष ही नहीं उपाध्यक्ष भी महिला ही है। प्रदेश में कई सीटों पर महिला शक्ति को प्रतिनिधित्व मिला है। टिकट को लेकर स्थिति-परिस्थिति अनुसार निर्णय होते है लेकिन शुरुआत से ही भाजपा ने महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य किया है। मोदी सरकार में निर्वाचन में ३३ प्रतिशत महिला आरक्षण का बिल आया है और मप्र में शिवराजङ्क्षसह चौहान ने महिला सशक्तिकरण के लिए योजना शुरू की है।

- बहादुर सिंह बोरमुंडला, भाजपा जिलाध्यक्ष

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