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उज्जैन। नगर निगम कि अतिक्रमण विरोधी मुहिम कि जमीनी हकीकत चंद दिनों में ही टाय टाय फिस हो जाती है। निगम दल-बल के साथ जहां से अतिक्रमण हटाता है वहां फिर से अंगद के पैर कि तरह अतिक्रमण पसर जाता है। बुधवार को निगम गैंग ने रेलवे स्टेशन के समीप व देवासगेट से अतिक्रमण हटाएं। लेकिन ये जगह कितने दिन खाली रहती है यह देखना है। क्योंकि बीते दिनों ही निगम ने फ्रीगंज से गुमटी, ठेलें हटवाएं थे, लेकिन चंद दिनों में वे फिर उसी स्थान पर लग गए। बड़ा सवाल यहीं कि ऐसी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का मतलब ही क्या...?
निगमायुक्त के निर्देश पर २० दिन पहले निगम गैंग ने टॉवर चौपाटी के पास नारियल दुकान व गुमटी का अतिक्रमण हटाया था। चंद दिनों में ही गुमटी व दुकान फिर उसी जगह लग गई। अमले की सारी मेहनत बेकार क्योंकि अब फिर से यातायात में परेशानी आने लगी। यहीं नहीं टॉवर पर अंबेडकर प्रतिमा के पास लाइन से फल के ठेलें खड़े होते है। जो आधी सड़क घेर लेते है। रोज का यहीं हाल है, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं। निगम ने रेलवे स्टेशन के पास चाय-नाश्ता दुकान व अवैध सांची पॉर्लर सख्ती से हटवाया। पहले भी इस क्षेत्र को निगम अतिक्रमण मुक्त करा चुका है, लेकिन कुछ ही दिनों में राजनीतिक सिफारिशों पर अतिक्रमण पसर जाता है। फिर देवासगेट कि सड़क मुक्त हुई है, लेकिन देखना होगा कि ये स्थिति कितने दिन रहती है।
नगर निगम अपने अतिक्रमण अमलें पर हर माह लाखों रुपए खर्च करता है। कार्रवाई का हल्ला दिखाकर गैंग मौकों पर पहुंचती है, अतिक्रमण दिखने के लिए हटता भी है लेकिन कुछ ही समय में फिर वहीं हाल। ऐसे में निगम का आर्थिक नुकसान तो होता ही है, इसका शहर को कोई फायदा नहीं मिलता। बुधवार को सहायक आयुक्त सुबोध जैन, गैंग प्रभारी मोनू थनवार आदि ने रेलवे स्टेशन के पास खाली भूमि पर लगी गुमटी व चाय-नाश्ता दुकानों के अतिक्रमण हटवाएं।
इनका कहना -
अतिक्रमण हटाने कि प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है। सख्ती के साथ अतिक्रमण हटवाएं है। यदि फिर से वे जगह अतिक्रमित हुई है तो सामान व गुमटी जब्ती कर जुर्माना लगाएंगे। टीम को सतत निगरानी के निर्देश भी दिए है।
डॉॅ. विजय कुमार जे., निगमायुक्त
Published on:
04 Jan 2018 11:21 am
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