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रविवार को होगी पीएचडी प्रवेश परीक्षा, आरएसी का गठन, डीन की जगह विभागाध्यक्ष को काम

विक्रम विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा 2018 के लिए शोध सलाहकार समिति (आरएसी) का गठन किया गया है।

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उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा 2018 के लिए शोध सलाहकार समिति (आरएसी) का गठन किया गया है। इस समिति में संकायाध्यक्ष की जगह विषय के विभागाध्यक्ष या फिर अध्ययन बोर्ड के अध्यक्ष को शामिल किया जाएगा। बता दें, विक्रम विवि में लगभग संकाय के संकायाध्यक्ष के पद खाली पड़े हुए हैं। वर्षों से इन संकायाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई। इस कारण शोध से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विवि में पीएचडी और एमफिल में प्रवेश के लिए करीब 19 विषयों में 922 आवेदन प्राप्त हुए हैं। 7 अक्टूबर रविवार को पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी।

7 अक्टूबर को परीक्षा
विक्रम विवि में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा 7 अक्टूबर को आयोजित होनी है। विवि प्रशासन परीक्षा के बाद ही रिजल्ट घोषित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए परीक्षा के बाद ही आरएसी को मूल्यांकन और रिजल्ट घोषित करने का काम करना है। इसके लिए सभी विभागाध्यक्षों को सूचना भेजी गई है।

मेधावी विद्यार्थी वैज्ञानिक संस्थानों का करेंगे भ्रमण
मप्र मिशन एक्सीलेंस कार्यक्रम अंतर्गत मध्यप्रदेश विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद् (मैपकास्ट) द्वारा बारहवीं विज्ञान मंथन यात्रा 14 अक्टूबर तक आयोजित की गई है। विज्ञान मंथन यात्रा के लिए प्रदेश के सभी जिलों से 625 मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया है। इनमें आठवीं, नौवीं, दसवीं, ग्यारहवी एच बारहवीं (केवल विज्ञान विषय) के विद्यार्थी हैं।

वेद ज्ञान के साथ विज्ञान का अध्यापन
वेदाध्ययन करने वाले विद्यार्थी दूसरे विषयों को भी समान रूप से सीखें और उनमें दक्षता हासिल करें। वेद अध्ययन कर केवल कर्मकाण्ड कराने वाले पुजारी-पुरोहित ही तैयार नहीं हो बल्कि वेदों के साथ विज्ञान के ज्ञान के साथ संपूर्ण ज्ञान देकर युवाओं को तैयार करने के लिए चिंतामण रोड स्थित महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान के परिसर में राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय प्रारंभ किया गया है। विद्यालय से उतीर्ण छात्र को वेद विभूषण का प्रमाण- पत्र मिलेगा।

राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय में वैदिक संस्कृति एवं ज्ञान के अनुरूप वास्तविक परंपरागत,उच्च अनुशासन का पालन करने वाला जीवन ठीक उसी तरह होगा, जैसा प्राचीन काल में गुरुकुल में रहता था। राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय की स्थापना करने का निर्णय लगभग 30 वर्ष पूर्व लिया गया था। इसकी परिकल्पना थी कि वेद की मौखिक परंपरा का अध्ययन कर रहे छात्रों को वेद के साथ- साथ अन्य विषयों का अध्ययन कराते हुए उन्हें देश की मूल धारा से जोड़कर एक आदर्श व्यक्तित्व एवं भारतीय वैदिक संस्कृति का संरक्षण किया जाए। इस विद्यालय से तैयार होने वाले छात्र तेजस्वी और समाज के सामने एक आदर्श स्थापित करेंगे।

यह विद्यालय पूर्ण रूप से नि:शुल्क आवासीय विद्यालय रहेगा। छात्रों के आवास एवं भोजन की व्यवस्था प्रतिष्ठान परिसर के छात्रावास में नि:शुल्क रहेगी। इसके अलावा छात्रों को पारंपारिक वेशभूषा में रहना होगा,तो प्रतिष्ठान की ओर से प्रदान की जाएगी।

एक सत्र में 90 विद्यार्थी
राष्ट्रीय आदर्श वेद विद्यालय के एक सत्र में 90 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलगा। वेद की सभी 9 शाखाओं का अध्ययन होगा। प्रत्येक शाखा के लिए प्रतिवर्ष 10 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। देशभर 93 वेद विद्यालय और 256 गुरुकुल परंपरा इकाइयों के वेदभूषण यानि छठवें वर्ष के लिए वेद विभूषस के लिए योग्यता के आधार पर प्रवेश की पात्रता होगी।