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पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के लिए महाकाल में पूजा

वाजपेयी की हालत नाजुक है, वाजपेयी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना को लेकर उज्जैन के श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में पूजन की गई।

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उज्जैन. लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक है, वाजपेयी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना को लेकर उज्जैन के श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में पूजन की गई। पंडे-पुजारियों ने मंत्रोच्चारण कर जलाभिषेक और महामृत्युंजय पूजन संपन्न की।

अभी आधिकारिक जानकारी नहीं
वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक नई जानकारी सामने नहीं आई है, मीडिया से प्राप्त जानकारी अनुसार बड़ी हस्तियों का अस्पताल पहुंचना जारी है। वाजपायी को गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकडऩ, मूत्रनली में संक्रमण आदि के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह के शिकार 93 वर्षीय अटल बिहारी वाजपाये का एक ही गुर्दा काम करता है। वाजपेयी का इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि सुबह से अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत नाजुक बताई जा रही है। एम्स के अनुभवी डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं।

इनकी जोड़ी हमेशा रही चर्चाओं में
भारतीय राजनीति में अटल-आडवाणी की जोड़ी हमेशा चर्चा में रहती थी, भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं ने मिलकर पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुँचाया। अटल बिहारी की भाषण शैली और उनकी बेबाकी के लिए विपक्ष भी हमेशा उनकी सराहना करता रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने। सबसे पहले वे 1996 में 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने। दूसरी बार वे 1998 में प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने की वजह से 13 महीने बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए। 13 अक्टूबर को वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2004 तक अपना कायज़्काल पूरा किया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं।

उनकी कविता : मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?
तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।
मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफऱ,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
ददज़् अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।
प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।
आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

.....मौत से ठन गई।