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Mahakal Lok Phase-2 : आज महाकाल लोक में दिवाली, दुनिया की सबसे हाइटेक लेकिन दूसरी सबसे बड़ी रसोई तैयार

Mahakal Lok Phase-2 : उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक एक बार फिर भव्य आकर्षण दिखाने के लिए तैयार है। सीएम शिवराज सिंह चौहान आज 5 अक्टूबर 2023 गुरुवार शाम 7 बजे लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां तैयार हुई... दुनिया की सबसे हाईटेक और दूसरी सबसे बड़ी रसोई का लोकार्पण भी करेंगे...

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Mahakal Lok Phase-2 : उज्जैन के महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक एक बार फिर भव्य आकर्षण दिखाने के लिए तैयार है। महाकाल लोक फेज-2 यानी महाकाल लोक के इस दूसरे चरण का सीएम शिवराज सिंह चौहान आज 5 अक्टूबर 2023 गुरुवार शाम 7 बजे लोकार्पण करेंगे। आपको बता दें कि श्री महाकोल लोक फेज-2 के लोकार्पण को लेकर प्रशासन ने पूरे जोर-शोर से तैयारी की है। लोकार्पण के इस अवसर पर महाकाल मंदिर के साथ ही श्रीमहाकाल लोक को देशी-विदेशी सुगंधित फूलों से सजाया जा रहा है। फूलों की खुशबू के साथ ही, रंगारंग रोशनी से महाकाल का आंगन चमक उठेगा। रंगबिरंगी ये रोशनी महाकाल लोक में दिवाली का आभास कराएगा। इसके साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां तैयार हुई... दुनिया की सबसे हाईटेक और दूसरी सबसे बड़ी रसोई का लोकार्पण भी करेंगे। आज के बाद यानी 6 अक्टूबर शुक्रवार से इस हाईटेक रसोई में देशी-विदेशी हर श्रद्धालु आराम से बैठकर भोजन कर सकेंगे। इस हाईटेक रसोई के अमेजिंग फैक्ट किसी को भी आंखें और मुंह खोलने को मजबूर कर देंगे और शब्द होंगे Wow.....वाह...

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की किचन है देश की दूसरी सबसे बड़ी किचन

- महाकाल मंदिर परिसर में नजर आने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी, लेकिन सबसे हाइटेक रसोई किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है।

- 50 हजार वर्गफीट में बनी इस विशाल रसोई या अन्नक्षेत्र की लागत 27 करोड़ रुपए है।

- महाकाल लोक बनने के बाद से ऐसी विशाल रसोई की जरूरत महसूस की जा रही थी।

- इंदौर के कारोबारी विनोद अग्रवाल इसके लिए आगे आए।

- डिजाइन फाइनल होने के बाद मंदिर समिति को उन्होंने बिल्डिंग बनाने की सहमति दे दी।

- विनोद अग्रवाल ने दो मंजिला अन्न क्षेत्र के लिए 22 करोड़ रुपए मंदिर समिति को दिए हैं।

- इनके साथ ही गुड़ग़ांव के प्रवीण अरोरा ने 5 करोड़ रुपए के साथ अन्य सामान दिया है।

- महाकालेश्वर मंदिर समिति इस भोजनशाला का संचालन करेगी।

- यह भोजन महाकाल के हर भक्त के लिए नि:शुल्क उपलब्ध होगा।

- महाकाल परिसर में बने इस अन्नक्षेत्र के लिए ये हाईटेक मशीनें अहमदाबाद और चेन्नई मंगवाई गई हैं।

- इस नए अन्नक्षेत्र या रसोई में एक साथ करीब 8-10 हजार श्रद्धालु भोजन कर सकेंगे।

- इसीलिए दावा किया जा रह है कि यह देश का सबसे बड़ा हाईटेक अन्नक्षेत्र या रसोई है।

- मंदिर परिसर में इतना हाईटेक और इतना विशाल अन्नक्षेत्र बनाने का मकसद केवल इतना है कि यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु भूखा न जाए।

- आपको बता दें कि महाकाल मंदिर विस्तारीकरण फेज 2 के तहत दो साल पहले 2021 में इसकी शुरुआत की गई थी।

- कोई भी श्रद्धालु को अब खाने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। -- यह दो मंजिला है और यहां एक दिन में एक लाख लोग भोजन कर सकेंगे।

- पहले ग्राउंड फ्लोर पर अंदर जाते ही होटल जैसा बड़ा लॉन है।

- यहां श्रद्धालु बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकेंगे।

- इसके बाद बना है विशाल डाइनिंग हॉल। -

इस डाइनिंग हॉल में करीब 4500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।

- दोनों फ्लोर पूरी तरह एयर कंडीशन हैं।

- इस रसोईघर में तीन बड़ी लिफ्ट लगी हैं।

- इनमें दो लिफ्ट श्रद्धालुओं के लिए हैं।

- तो वहीं तीसरी और सबसे बड़ी लिफ्ट सामान लाने ले-जाने के लिए है।

- वहीं जो व्यवस्था इस हाईटेक किचन के ग्राउंड फ्लोर पर है, वही व्यवस्था दूसरे फ्लोर पर भी है।

- ऊपर भी इतना ही बड़ा डायनिंग हॉल है।

- यानी दोनों ही मंजिलों पर दो बड़े किचन हैं।

- दोनों ही किचन में हर काम के लिए अलग-अलग मशीनें इंस्टॉल्ड की गई हैं।

- करीब 5 करोड़ की लागत से ये हाईटेक मशीनें यहां लगाई गई हैं।

- इन सभी मशीनों को अपनी जरूरत के मुताबिक मॉडिफाई और कस्टमाइज भी कराया गया है।

- यहां बड़े-बड़े वॉशरूम भी हैं।

- पीने के पानी के लिए बड़े वाटर कूलर लगे हैं।

- सामान रखने के लिए एक विशाल स्टोर रूम भी है।

- इस रसोई में 50 वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए भी अलग से भोजन करने की व्यवस्था की गई है।

- इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह दुनिया सबसे हाइटेक रसोई है, जहां सब्जी काटने से लेकर, खाना बनाने और बर्तन धुलने का काम सिर्फ मशीनें करेंगी। यानी सारा सिस्टम ऑटोमैटिक।

- एक मशीन में सब्जी डाल दी जाएगी, जिसमें से धुलकर सब्जी खुद-ब-खुद बाहर आ जाएगी।

- सब्जी काटने के लिए दूसरी मशीन लगाई गई है।

- सब्जी तीसरी मशीन में पकेगी।

- मसालों के लिए मशीन में अलग-अलग बॉक्स लगे हैं।

- इनकी मदद से नपे-तुले मसाले सब्जी में डाले जाएंगे।

- सब्जी में पानी डालने के लिए अलग से कंटेनर लगे हैं।

- अब रोटियों की मशीन में आटा डाला जाएगा, पानी डालते ही थोड़ी देर में गुंथा हुआ आटा निकल आएगा।

- अब रोटी मशीन की मदद से आटे की लोई तैयार होंगी। यहीं से लोई रोटी मशीन में चली जाएगी।

- ऑटोमैटिक भट्टी में लोई से रोटियां खुद ब खुद सिक कर बाहर आ जाएंगी।

- बर्तन धोने के लिए अलग से डिश वॉशर मशीन लगाई गई है।

- इसमें बर्तन डालते ही बर्तन अपने आप धुल जाएंगे।

- यह मशीन चैन्नई से मंगवाई गई है।

ऐसे परोसा जाएगा भोजन

- मंदिर प्रशासन ने अन्नक्षेत्र में मशीनों के माध्यम से खाना बनाने से लेकर खाना परोसने की जिम्मेदारी 80 लोगों को दी है।

- इनमें से 50 लोग खाना बनाने का काम करेंगे। वहीं, भोजन-प्रसादी को परोसने के लिए समेत अन्य जिम्मेदारियों के लिए 30 लोग तैनात रहेंगे।

- अन्न क्षेत्र में भोजन बनाने के लिए सीएनजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

- महाकाल लोक की ये हाईटेक रसोई सुबह 10:30 बजे से रात 9 बजे तक खुली रहेगी।

- मंदिर समिति का कहना है कि इसका समय बढ़ाया भी जा सकता है।

- अलग-अलग शिफ्ट में भोजन कराया जाएगा।

- मंदिर प्रशासन का कहना है कि महाकाल लोक बनने के बाद से भक्तों की संख्या बहुत बढ़ गई है।

- वर्तमान में रोजाना एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शनों के लिए आ रहे हैं।

- इतने लोगों का खाना एक साथ बनाना बड़ी चुनौती था, इसलिए हाईटेक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

- पहले छोटा अन्नक्षेत्र था। इसमें नि:शुल्क भोजन का संचालन किया जाता था।

- इस अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन 3 से 5 हजार श्रद्धालु महाप्रसादी ग्रहण करते थे।

इनका कहना है...

मंदिर प्रशासक संदीप सोनी के मुताबिक सबसे बड़े मंदिर शिरडी, तिरुपति बालाजी और बंगला साहेब समेत अन्य तीर्थ स्थलों पर जो अन्न क्षेत्र संचालित हैं, उनके मुकाबले यह अन्न क्षेत्र बहुत हाईटेक है। देश में जहां भी जो उपकरण बेस्ट मिलते हैं, वहां से मंगवाकर उन्हें यहां लगाया गया है। जैसे- कोयम्बटूर से वैजल्स, कढ़ाही और प्रेशर कुकर आए हैं। अहमदाबाद से रोटी मशीन और चेन्नई से डिश वॉशर मशीन मंगाई गई है।

शुरुआत में 50 हजार भक्तों को मिलेगा भोजन
6 अक्टूबर से देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु नए अन्नक्षेत्र में भोजन प्रसादी ग्रहण कर सकेंगे। नवनिर्मित महाकाल मंदिर अन्नक्षेत्र में शुरुआत में 50 हजार भक्तों के लिए प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था रहेगी। बाद में इसकी क्षमता को एक लाख श्रद्धालु प्रतिदिन किया जाएगा।

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