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स्मार्ट सिटी के दो प्रोजेक्ट के बीच प्राचीन रूद्र सागर की हो गई ऐसी हालात

स्वच्छ पानी की उपलब्धता के लिए पीएचई सीवर प्रोजेक्ट पर निर्भर, मृदा में निर्माण शामिल लेकिन पानी की प्लानिंग नहीं

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Such conditions are done by ancient Rudra Sagar

उज्जैन. स्मार्ट सिटी में महाकाल क्षेत्र विकास के प्रमुख भाग रुद्रसागर का कायाकल्प दो प्रोजेक्ट के बीच झूल रहा है। मृदा में रुद्रसागर पर होने वाले निर्माण तो शामिल है, लेकिन इसमें साफ पानी कहां से आएगा, इसकी कोई प्लानिंग नहीं है। इसके विपरीत साफ पानी के लिए पीएचई सीवर प्रोजेक्ट पर निर्भर है। एेसे में यदि वर्तमान स्थिति से ही कार्य होते हैं तो जब तक दोनों प्रोजेक्ट पूरे नहीं होंगे, रुद्रसागर का पूर्ण विकास नहीं हो सकेगा।

सिंहस्थ में पांच करोड़ से अधिक खर्च कर छोटे-बड़े रुद्रसागर का विकास व सौंदर्यीकरण किया गया था। सिंहस्थ बाद से ही रुद्रसागर के संधारण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्मार्ट सिटी में योजना बनी लेकिन इनके धरातल पर उतरने के लंबे इंतजार में रुद्रसागर फिर सरोवर से दलदल में तब्दील हो गया है। बड़े रुद्रसागर में जलकुंभी ने इसकी खूबसूरती को ढंक दिया वहीं, सूखा छोटा रुद्रसागर गंदगी से पटा है। न इनका उपयोग क्षेत्र की खूबसूरती बढ़ाने में हो रहा है और नहीं शहरवासी या आने वाले श्रद्धालुओं को इनका कोई लाभ मिल रहा है। महाकाल क्षेत्र के इस प्रमुख स्थल की अधर में पड़ी यह स्थिति तब है जब शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल हुए दो वर्ष होने वाले हैं।

इसलिए उलझन में रुद्रसागर : करीब ३०० करोड़ रुपए की मृदा (महाकाल रुद्रसागर इंट्रीग्रेटेड डवेलपमेंट एक्शन प्लान) अंतर्गत रुद्रसागर का भी विकास होना है। प्लान में रुद्रसागर पर किए जाने वाले निर्माण की योजना तो तैयार की गई है, लेकिन इसमें साफ पानी की व्यवस्था कहां से होगी, इसको लेकर कोई ठोस प्लानिंग इसमें शामिल नहीं है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने यह जिम्मा नगर निगम पीएचई को सौंपा है। इधर पीएचई ने पृथक से कोई योजना तैयार नहीं की है। स्मार्ट सिटी अंतर्गत ही करीब ४०० करोड़ रुपए से सीवरेज प्रोजेक्ट में दो एमजीडी का ट्रीटमेंट प्लांट रुद्रसागर पर लगाने का प्रस्ताव है। इस प्लांट से रुद्रसागर में आने वाले गंदे पानी को साफ कर रुद्रसागर में स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल पीएचई इसी योजना पर निर्भर है। एेसे में जब तक दोनों प्रोजेक्ट पूरे नहीं होंगे, तब तक रुद्रसागर का भी पूरा विकास नहीं हो सकेगा।

अब बैठक में हो सकता है निर्णय

मृदा में आवश्यक संशोधन करने के बाद कुछ दिनों में कमेटी की बैठक होने वाली है। इसमें स्मार्ट सिटी कंपनी अधिकारियों के साथ ही पीएचई, यूडीए, मंदिर प्रशासन आदि के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। संभावना है कि इस बैठक में रुद्रसागर के सौंदर्यीकरण व इसमें स्वच्छ पानी की उपलब्धता को लेकर ठोस निर्णय हो सकते हैं।

अभी दोनों प्रोजेक्ट्स के ऐसे हंै हाल

मृदा - महाकाल रुद्रसागर इंट्रीग्रेटेड डवेलपमेंट एक्शन प्लान में करीब ३०० करोड़ रुपए से महाकाल व आसपास विकास कार्य होना है। इसमें आवागमन व्यवस्था, सौंदर्यीकरण, हेरिटेज विकास आदि शामिल है। प्लान लगभग फाइनल हो गया था। कुछ दिन पूर्व हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक में जनप्रतिनधियों ने कुछ संशोधन के प्रस्ताव रखे थे। इसमें रुद्र सागर में बनने वाली विशाल प्रतिमा को दूसरे चरण में लेने को भी कहा था। सुझावों के आधार पर प्लान में आवश्यक संशोधन कर संशोधित डिजाइन तैयार की जा रही है। मृदा कमेटी की ओर से अप्रूवल मिलने के बाद इसके टेंडर जारी किए जाएंगे।
सीवरेज - करीब ४०० करोड़ रुपए से सीवरेज प्रोजेक्ट लागू होना है । इसमें गंदे पानी की निकासी के लिए जमीन में बड़ी पाइप लाइन का जाल बिछने के साथ ही ट्रीटमेंट के लिए प्लांट स्थापित होना है। सीवरेज प्लान की डीपीआर तैयार होने के साथ ही प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने व एजेंसी तय होने का कार्य हो चुका है। तय एजेंसी ने पाइप लाइन बिछाने के लिए सर्वे पूरा कर लिया है। रिपोर्ट स्वीकृति के लिए भोपाल भेजी गई थी, जिसके बाद से आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ठेकेदार कंपनी ने प्रोजेक्ट अंतर्गत प्लांट स्थापित करना शुरू कर दिया है। पाइप लाइन बिछने का कार्य कब शुरू होगा, इसका कोई निर्धारण नहीं हो सका है।
पूर्व बैठक में प्राप्त सुझाव अनुसार मृदा में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। जल्द बैठक कर टेंडर जारी किए जाएंगे। रुद्रसागर में स्वच्छ पानी की उपलब्धता को लेकर पीएचई द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
- अवधेश शर्मा, सीइओ स्मार्ट सिटी कंपनी

रुद्रसागर में स्वच्छ पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना है। यह कार्य सीवरेज प्रोजेक्ट अंतर्गत ही किया जाना है।
- धर्मेंद्र वर्मा, इइ पीएचइ्र