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नागदा. स्वयं के घर का सपना संजोने वाले हितग्राहियों का सपना अभी अधूरा ही है। कारण अफसरों की लापरवाही ने शहर के सैकड़ों हितग्राहियों के मकानों का अधूरा निर्माण कर छोड़ रखा है। मकानों को पूरा करने के लिए हितग्राही प्रतिमाह बैंक व नगर पालिका के चक्कर काट रहे हैं। बावजूद परेशानी का निराकरण नहीं हो पा रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के समक्ष छोटा बैंक अकाउंट होने से उन्हें योजना की किस्त निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राशि नहीं निकलने से हितग्राहियों के मकान अधूरे पड़े हैं। साथ ही अगली किस्त के लिए उन्हें योजना के दस्तावेजों को दोबारा जमा करना पड़ेगा।
क्या है मामला
शहर में सैकड़ों हितग्राहियों को नगर पालिका की अगुवाई में प्रधानमंत्री योजना अंतर्गत राशि दी जा रही है। राशि चार किस्तों में संबंधित बैंकों के खाते में डाली जा रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब योजना की अंतिम किस्त राशि निकालने १३०० हितग्राही बैंक पहुंचे। बैंकों से राशि आरहण करने के दौरान उन्हें पता चला कि वे प्रतिमाह दस हजार रुपए ही निकाल सकेंगे। शहर के शेष ७७३ हितग्राहियों का सर्वेकर उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाना सुनिश्चित है।
क्या है योजना
वर्ष २०२२ तक शहर के प्रत्येक नागरिक को आवास दिलाने के उद्देश्य से शुरू हुई प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रथम किस्त ६० हजार रुपए, दूसरी किस्त ६० हजार रुपए, तीसरी किस्त एक लाख रुपए व अंतिम किस्त ३० हजार रुपए की दी जाती है। हितग्राही द्वारा किस्त के आहरण के लिए योजना के अंतर्गत बनाए गए मकान का फोटो नपा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। जिसके बाद से मकान निर्माण की प्रगति देख योजना की राशि समय-समय पर स्वीकृत की जाती है।
अंतिम किस्त का वितरण शुरू
मार्च के अंतिम सप्ताह में योजना की अंतिम किस्त हितग्राही के खातें में भेजी जा रही है। उक्त निर्णय नगर पालिका अफसरों की अगुवाई में बीते दिनों लिया गया। साथ ही आगामी अप्रैल में शेष बचे पात्र हितग्राहियों का सर्वे कर सूची बनाया जाना सुनिश्चित किया गया है। जिसके बाद से योजना का लाभ शेष हितग्राहियों को दिया जाएगा। बता दें, कि शहर में १३०० हितग्राहियों को प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया गया है। शेष ७७३ लोगों का सर्वे कर सूची बनाया जाना विचाराधीन है। पूर्व के हितग्राहियों को अंतिम किस्त देने के बाद अन्य लोगों को शामिल किया जाएगा।
क्या है कियोस्क अकाउंट
जीरो बैलेंस पर कियोस्क (ऑनलाइन पोर्टल संचालक) सेंटरों पर बैंकों की तर्ज पर अकाउंट खोले जा सकते है। ऐसे अकाउंट खोलने के लिए अधिक दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही बैंकों के बजाए कियोस्क सेंटरों पर बैंकों की तरह राशि का लेन देन किया जा सकता है।
& कुछ हितग्राहियों के अकांउट कियोस्क सेंटर पर खुलवाएं गए है। उक्त अकाउंट से प्रतिमाह १० हजार रुपए की राशि का ही आहरण किया जा सकता है। शेष बची किस्तों के लिए हितग्राहियों को बैंकों की मुख्य शाखा से खुले हुए अकाउंट ही स्वीकार किए जाएंगे।
अशोक मालवीय
अध्यक्ष, नपा
Published on:
30 Mar 2018 08:01 am
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