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सरकार का जवाब- ‘धमाका नहीं, पटाखों की आतिशबाजी थी’, उज्जैन के मोहर्रम जुलूस कार ब्लास्ट केस की कोर्ट में सुनवाई

Moharram car blast case: उज्जैन में मुहर्रम जुलूस के दौरान किए गए कार ब्लास्ट मामले को लेकर सरकार ने कोर्ट में अपना जवाब दिया है। हिंदू जागरण मंच की ओर से अभिभाषक जयेश गुरनानी ने ये जनहित याचिका दायर की गई है।
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Ujjain Moharram car blast case

Ujjain Moharram procession car blast case- मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट के समक्ष रखाअपना जवाब (फोटो सोर्स- Patrika)

Ujjain Moharram car blast case: मध्य प्रदेश के उज्जैन में 23 जून के रात मुहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से कार को हवा में उठाकर ब्लास्ट करने वाले मामले में एमपी हाई कोर्ट की इंदौर में दायर याचिका में सुनवई हुए। इस मामले पर मध्य प्रदेश सरकार ने अपने जवाब में बताया कि उज्जैन के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस में क्रेन से कार हवा में उठाने और फिर उसमें धमाके के जो फोटो-वीडियो हैं, वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) से बने हैं।

इन धमाकों को सोची-समझी रणनीति और देशद्रोह की गतिविधियों की तरह बताते हुए हाईकोर्ट में हिंदू जागरण मंच द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने कार में हुए धमाकों को पटाखों की आतिशबाजी बताया। इसके बाद कोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) से इसकी जांच कराने की जरूरत को खारिज कर दिया।

हिंदू जागरण मंच ने NIA जांच की मांग की थी

हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया की ओर से अभिभाषक जयेश गुरनानी ने ये जनहित याचिका दायर की है। इसमें मांग की गई है कि बड़नगर में 23 जून को मोहर्रम जुलूस में ताजियों को ले जाने के दौरान कार में ब्लास्ट किया गया था और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत ये अपराध है। ये अपराध राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के जांच की श्रेणी का है। इसकी जांच एनआइए द्वारा की जानी चाहिए थी। साथ ही मोहर्रम जुलूस को लेकर एक गाइड लाइन बनाई जाए।

सरकार ने कहा- NIA जांच की आवश्यकता नहीं

मामले में गुरुवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि कार में मिले सबूत एफएसएल जांच को भेजे हैं, रिपोर्ट नहीं आई है। गिरफ्तार आरोपियों की ओर से दिए बयान भी कोर्ट के समक्ष रखे गए। उन्होंने बयान दिया था कि दो अखाड़ों के बीच करतब को लेकर होड़ थी। इसके चलते क्रेन से हवा में उठाई कार में मामूली आतिशबाजी रखकर जलाई थी। उसमें दो लोग भी मौजूद थे। उन्हें कोई चोट नहीं आई। इससे साफ है कि कार में धमाका नहीं, मामूली आतिशबाजी की थी।

अब चार सप्ताह बाद मामले में सुनवाई

इस पर कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि सरकार ने मोहर्रम के दौरान गाड़ी में विस्फोटक नहीं होकर पटाखे बताए। हालांकि इसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। चूंकि जांच करने वालों ने माना है कि यह एक व्यक्ति द्वारा किया गया स्टंट था, जिसके लोग पहले से ही उस वैन में बैठे हुए थे, इसलिए इसकी एनआइए से जांच कराने की मांग को नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने इस याचिका में जो अन्य मांग की गई है, उसके बारे में सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अब चार सप्ताह बाद मामले की सुनवाई होगी।