13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Maha Ashtami Puja: महाष्टमी पर भी महामारी का साया, विशेष पूजा से करेंगे कोरोना का खात्मा

Maha Ashtami Puja: नवरात्रि के चलते इस बार भी जिला प्रशासन की ओर से नगर पूजा करने की अपील...।

2 min read
Google source verification
chobees_khamba_mata.jpg

उज्जैन: सम्राट विक्रमादित्य ने शुरू की थी नगर पूजा की शुरुआत...।

उज्जैन। नवरात्र पर्व की महाष्टमी (maha ashtami puja) मंगलवार को है, लेकिन इस बार भी नगर पूजन में पिछले साल की तरह कोरोना का साया मंडरा रहा है। मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित है। बता दें कि दो वर्षों से निरंजनी अखाड़े के संतों की ओर से चैत्र मास की नवरात्रि की अष्टमी पर नगर पूजा कराई जा रही है, वहीं पूर्व कलेक्टर शशांक मिश्रा ने भी नागरिकों, प्रबुद्धजनों ने शारदीय नवरात्रि पूजा की तरह इसे करने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने अष्टमी पर नही करते हुए बाद में कोरोना को नष्ट करने के लिए नगर पूजा कराई थी, उसके बाद महामारी का प्रकोप थम गया था।

यह भी पढ़ेंःदो खंभों में समाई हैं देवी की प्रतिमाएं, नाम पड़ा चौबीस खंभा

इस बार भी कोरोना के संक्रमण (coronavirus) का खतरा बढ़ चुका है, इसे गंभीरतापूर्वक लेते हुए पूर्व कलेक्टर की तरह वर्तमान कलेक्टर आशीष सिंह की ओर से भी यह पूजा विधि-विधान से संपन्न कराना चाहिए, ताकि महामारी का प्रकोप नष्ट हो सके।

यह भी पढ़ेंः महाअष्टमी पर कलेक्टर ने देवी को चढ़ाई मदिरा, सुख समृद्धि के लिए नगर पूजा

ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि यह वैश्विक आपदा है। लगातार कई लोग इसमें अपनी जान तक गंवा रहे हैं। माता से इस प्रकोप को नष्ट करने और नगरवासियों को रक्षा करने के लिए यह पूजा अवश्य ही की जाए, तो अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। अतः जनहित की सुरक्षा को देखते हुए कलेक्टर को नगर पूजा करना चाहिए।

यह भी पढ़ेंः महाकाल मंदिर में भक्तों के आने-जाने पर फिर लगा प्रतिबंध

गाइडलाइन का करें पालन

धर्माधिकारी पं. गौरव उपाध्याय का कहना है कि नगर में जिस तरह महामारी ने प्रचंड रूप ले लिया है, उसे केवल रणचंडी मां दुर्गा ही नष्ट कर सकती है। इसके लिए चैत्र की नवरात्रि (chaitra navratri 2021) महापर्व महाष्टमी के दिन नगर पूजा की परंपरा निभाई जा सकती है। उसे गाइडलाइन का पालन करते हुए संक्षिप्त रूप से ही निर्वाह किया जाए, अधिक भीड़-भाड़ और समूह के रूप में न निकले।

यह भी पढ़ेंः बढ़ते संक्रमण के बीच यहां रातों रात तैयार हुआ 100 बेड का वार्ड

निरंजनी अखाड़े के संत करते हैं पूजा

चौबीस खंभा माता मंदिर से जुड़े मनीष शर्मा ने बताया कि चैत्र मास में शासकीय पूजा की परंपरा तो नहीं है, लेकिन दो वर्ष से निरंजनी अखाड़े के संतों की ओर से नगर पूजा की जा रही है। इ बार हरिद्वार महाकुंभ में शामिल होने सभी संत वहां गए हैं, उनकी तरफ से अभी तक कोई सूचना नहीं आई है, लेकिन यदि प्रशासन चाहे तो कोरोना के भयंकर प्रकोप को देखते हुए यह पूजा की जा सकती है।

विक्रमादित्य ने शुरू की थी परंपरा

पुजारी राजेश गुरू बताते हैं कि नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य ने शुरू की थी। उन्होंने इसे नगर की रक्षा व संपन्नता के लिए शुरू की थी, जिसका निर्वहन जिला प्रशासन की ओर से शारदीय नवरात्र में किया जाता है। नगर के परकोटे ें दो देवियों को स्थापित किया गया था, जिनकी प्रतिमाएं आज भी महामाया-महालाया के नाम से विराजमान है।

यह भी पढ़ेंः Motivational: कैंसर से जीतने के बाद कोविड को भी हराया, ऐसे जीती जंग