
Ujjain: बड़नगर रोड पर मिनी सिंहस्थ सा नजारा, कथामृत में डूबकी लगाने को उत्साहित लोग
Ujjain. सिंहस्थ 2016 के सात वर्षों बाद बड़नगर रोड का नजारा देखते ही बना। यहां सीहोरवाले महाराज पं. प्रदीप मिश्रा की 4 से 10 अप्रेल तक शिव महापुराण का कथाअमृत बरस रहा है। इसमें डूबकी लगाने के लिए देश के हर कौने से लोग परिवारों और छोटे-छोटे बच्चों के साथ पहुंचे हैं। पहले ही दिन करीब 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। अहतियातन सोमवार रात 8 बजे से ही पुलिस ने कार्तिक मेला प्रांगण शंकराचार्य चौक से लेकर मुरलीपुरा तक नो वीकल जोन बना दिया था। यही व्यवस्था आने वाले 7 दिन तक लागू रहेगी। मुख्य मैदान जहां कथा हो रही है, वहां 3 बड़े पंडाल बने हैं, जिनकी बैठक क्षमता 3 लाख है।बड़नगर रोड पर कार्तिक मेला ग्राउंड से आगे खेत की जमीन को समतल कर पंडाल लगाया गया है। पंडाल की तरफ चारों दिशा से लोग अपने गुरुजी की एक झलक पाने, राजाधिराज महाकाल की नगरी अवंतिकापुरी में शिव की कथा सुनने को उत्साहित होकर आगे बढ़ रहे थे। दोपहर में 35.6 डिग्री पर आग उगलते सूरज की तपिश के बीच लोग परिवार के साथ जत्थों में कथा स्थल तक पहुंच रहे हैं। गर्म हवा के थपेड़ों के बीच चेहरे का पसीना सुकून और आनंद दे रहा है। बच्चों को कांधे पर बैठाकर काथमृत का रसास्वादन करने लोग श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जाप करते आगे बढ़ते जा रहे थे। कथा स्थल के चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई, पूरा क्षेत्र सभी दिशाओं से नो वीकल जोन बनाया गया था। ऐसे सिंहस्थ के भांति ही हाथठेलों की सवारी करते हुए कथा स्थल तक पहुंच रहे थे।
कथा के चलते बड़नगर रोड का पूरा दृश्य ही बदल गया है। जगह-जगह लोगों की प्यास बुझाने के लिए शीतल जल के प्याऊ लगे हैं, कहीं आरओ की कैन से तो कहीं काले मटकों से जल सेवा की जा रही थी। रोड किनारे छोटी-छोटी सैकड़ों दुकानें लग गई हैं, जिनमें बच्चों का मन बहलाने वाले गुब्बारे और खिलौने भी शामिल हैं। रुद्राक्ष और महाकाल लिखे टी-शर्ट के साथ ज्यूस, गन्ने का रस और नाश्ते के लिए कई रेस्टोरेंट भी खुल गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रवेश द्वार के समीप ही विशेष व्यवस्था की गई है। कथास्थल पर 108 एंबुलेंस और फायर बि्रगेड वाहन भी मौजूद रहा।दोपहर करीब एक बजे जत्थों की संख्या में तेजी आई, लेकिन इसके पहले पूरा पंडाल भर चुका था। आयोजकों ने लोगों की संख्या देख शामियाने लगाने का काम जारी रखा। शामियाने लगते जा रहे थे, लोग बैठते जा रहे थे। इतना ही नहीं लोगों में शिव महापुराण की कथा का उत्साह ऐसा था कि चादर, ओढ़नी से धूप से बचने का प्रयास करते रहे। कथा शुरू होने तक शामियाने लगने और उनमें आकर लोगों के बैठने का दौर जारी रहा। पं. मिश्रा ने जैसे ही ओम् ध्वनि का नाद किया, तो जिसे जहां जगह मिली, वहीं थम गया। बड़ी संख्या में लोग पेड़ों की छांव के नीचे बैठकर ही कथा का श्रवण करते रहे।
बड़े आयोजन के साथ कुछ खामियां भी नजर आईं। लाखों लोगों के लिए टायलेट की व्यवस्था कथा स्थल से बहुत दूर की गई, जिससे कई लोगों को असुविधा हुई। कई लोग खुले में ही शौच करते नजर आए। खेत पर पंडाल बनाने के लिए पराली जलाई गई, जिससे हवा के साथ काली राख उड़कर श्रद्धालुओं तक पहुंच रही थी। पेयजल की व्यवस्था भी पंडाल क्षेत्र से बाहर थी, जिससे रात-रात भर से पंडाल में जमे लोगों को पानी-शौच के लिए परेशान होना पड़ रहा था। तीन प्रमुख पंडाल में तो गर्मी से निपटने के लिए कहीं फव्वारें तो कहीं पंखे और कूलर लगे थे, लेकिन विस्तारित शामियानों में लोगों को भरी गर्मी में परेशान होना पड़ रहा था।
Published on:
05 Apr 2023 12:06 am
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