
Sadar MLA Complained to Lokayukta: उन्नाव में बीजेपी से सदर विधायक पंकज गुप्ता ने जिला पंचायत कार्यालय में तैनात बाबू के भ्रष्टाचार की लोकायुक्त से शिकायत की है। अपने शिकायती पत्र में सदर विधायक ने बताया है कि नक्शा पास करने में घोर अनियमिताएं बरती जा रही हैं। अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर रिश्वत की रकम से बड़ी संख्या में संपत्ति बनाई गई है। कई संपत्तियां गिफ्ट के रूप में भी मिली है। बाबू शासनादेश के अनुसार जिले में निवास भी नहीं करते हैं। उन्होंने जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। उल्लेखनीय है जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर बीजेपी की ही शकुन सिंह विराजमान है।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव के सदर विधानसभा से विधायक और स्थानीय निकायों के लेखक परीक्षा प्रतिवेदनों की जांच समिति के सभापति पंकज गुप्ता ने 3 जुलाई, 2026 को लोकायुक्त में शिकायत की थी। जिसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग को भी दी गई थी। अब शिकायती पत्र सामने आया है। अपने पत्र में सदर विधायक ने बताया कि जिला पंचायत में तैनात बाबू मनोज कुमार पाल बीते कई वर्षों से मानचित्र पटल का कार्य देख रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास करने की जिम्मेदारी जिला पंचायत के पास है जो जिला पंचायत के लिए आय का प्रमुख साधन है। जिले में विगत कई वर्षों से मानचित्र उपविधि लागू है लेकिन अपेक्षा के अनुरूप इनकम नहीं हुई है।
पंकज गुप्ता ने अपने पत्र में लिखा है कि जिले में प्लाटिंग, वेयरहाउस, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि के निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर लगातार हो रहे हैं। लेकिन कार्यालय के संज्ञान में लाये बिना ही मनोज पाल निजी हितों की पूर्ति करते हुए संबंधित को भरोसा देते हैं कि जिला पंचायत की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, आप निर्माण कार्य करते रहे। जिससे जिला पंचायत को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई है। जबकि मनोज पाल की चल अचल संपत्तियों में इजाफा हुआ है। मनोज कुमार पाल स्वयं, अपनी पत्नी और परियोजनाओं के नाम पर कई संपत्तियां अर्जित की है और अभी भी कर रहे हैं।
सदर विधायक ने बताया कि मनोज कुमार पाल ने एक खेल यह भी किया है कि काफी संख्या में भूखंड स्वामियों को मानचित्र पास करने के लिए नोटिस जारी की। नोटिस के आधार पर मिलने आए लोगों में से एक दो का नक्शा पास कराया गया। शेष को मिली-भगत से छोड़ दिया गया। जिससे जिला पंचायत को काफी नुकसान हुआ है।
सदर विधायक ने यह भी बताया है कि शासनादेश के अनुसार सरकारी कर्मचारी को नियुक्त जिले के मुख्यालय पर ही निवास करना आवश्यक है लेकिन मनोज पाल जनपद मुख्यालय में न रहकर प्रतिदिन लखनऊ से चार पहिया वाहन से आते जाते हैं। इसका प्रमाण नवाबगंज टोल बैरियर या मोबाइल के गूगल टाइमलाइन है। इसके पूर्व भी मनोज कुमार पाल के खिलाफ कई शिकायतें की गई जो लंबित है।
पंकज गुप्ता ने लोकायुक्त को दिए गए शिकायती पत्र में कहा है कि जिला पंचायत में 'मानचित्र उप विधि' लागू है। इसके बाद भी कितनी नोटिस जारी की गई और कितने के मानचित्र पास किए गए? इसकी भी जांच की जाए। मनोज कुमार पाल को घूस और गिफ्ट के माध्यम से अर्जित की गई संपत्तियों की भी जांच की जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय से 24 जुलाई, 2026 को प्रमुख सचिव पंचायती राज को पत्र भेजा गया है। यही पत्र सोशल मीडिया पर वायरल है।
Updated on:
11 Aug 2026 07:22 pm
Published on:
11 Aug 2026 07:22 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
