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Swami Avimukteshwaranand: योगी की मां पर कथित टिप्पणी से विवाद गहराया, शंकराचार्य ने कहा-मां का अपमान असहनीय

Shankaracharya Condemns Statement: मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मां पर कथित टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ गया। Swami Avimukteshwaranand ने Unnao में बयान देते हुए इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया।

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उन्नाव दौरे के दौरान बोले-मां का अपमान भारतीय संस्कृति के खिलाफ, जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

उन्नाव दौरे के दौरान बोले-मां का अपमान भारतीय संस्कृति के खिलाफ, जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Swami Avimukteshwaranand Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मां को लेकर एक मौलाना द्वारा की गई कथित अभद्र टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में संत समाज और धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand ने इस टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे भारतीय संस्कृति और मर्यादा के खिलाफ बताया है।

उन्नाव दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद और विचारों की भिन्नता स्वाभाविक है, लेकिन किसी की मां या परिवार को विवाद में घसीटना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में मां को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और किसी भी व्यक्ति की मां का अपमान पूरे समाज के लिए असहनीय है।

उन्नाव दौरे के दौरान दिया बयान

शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand हाल ही में Unnao के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर सामने आए विवादित बयान के बारे में सवाल किया। इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक या वैचारिक आलोचना की जा सकती है, लेकिन उसके परिवार या मां को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज की मर्यादा का प्रश्न है।

सनातन परंपरा में मां का सर्वोच्च स्थान

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन संस्कृति में मां को देवतुल्य माना गया है। भारतीय परंपरा में “मातृ देवो भवः” की शिक्षा दी जाती है, जिसका अर्थ है कि मां को देवता के समान सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्कृति में किसी की मां के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना न केवल अनुचित है बल्कि समाज के मूल्यों के खिलाफ भी है। उनका कहना था कि जो लोग धार्मिक पद या नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाते हैं, उनसे समाज को मर्यादित और संयमित भाषा की उम्मीद रहती है।

धार्मिक नेताओं की जिम्मेदारी पर जोर

इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को जोड़ने और समाज को सही दिशा देने की जिम्मेदारी धार्मिक नेताओं की होती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई धार्मिक नेता खुद ही अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करता है, तो यह समाज में गलत संदेश देता है। उनके अनुसार धार्मिक नेतृत्व का अर्थ केवल प्रवचन देना नहीं होता, बल्कि अपने आचरण और शब्दों से समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करना भी होता है।

बयान को बताया निंदनीय

शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand ने मौलाना की कथित टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐसी भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के चलते किसी भी व्यक्ति के परिवार को निशाना बनाना बेहद गलत है। इससे समाज में अनावश्यक तनाव और विवाद पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने की जगह अगर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा तो यह सामाजिक सौहार्द के लिए भी नुकसानदायक होगा।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

इस विवाद को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासन से भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाले ऐसे बयानों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में उचित कदम उठाए जाएं।

संत समाज और जनता एकजुट

शंकराचार्य ने कहा कि राजनीति में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मर्यादा और संस्कारों के मामले में पूरा संत समाज और देश की जनता एकजुट है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मां का अपमान किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि भारतीय समाज में परिवार और माता-पिता को बहुत सम्मान दिया जाता है और इसी परंपरा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

राजनीति में बढ़ती बयानबाजी पर चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में राजनीति और सार्वजनिक जीवन में बयानबाजी का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। अक्सर राजनीतिक या वैचारिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे विवाद बढ़ जाते हैं।सामाजिक विश्लेषकों के अनुसार ऐसी बयानबाजी न केवल लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करती है बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करती है।

सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जरूरत

धार्मिक और सामाजिक नेताओं का मानना है कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में सभी जिम्मेदार व्यक्तियों को अपने शब्दों और व्यवहार को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और संयम बनाए रखा जाए तो कई विवादों को जन्म लेने से पहले ही रोका जा सकता है।

विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मां को लेकर हुई कथित टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। कई संगठनों और सामाजिक नेताओं ने भी इस तरह की बयानबाजी की आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा की सीमाएं क्या होनी चाहिए।

मर्यादा और संस्कारों की रक्षा जरूरी

इस पूरे विवाद पर शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand का कहना है कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्कृति और संस्कार हैं। यदि इन मूल्यों की रक्षा नहीं की गई तो समाज में विभाजन और तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि विचारों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन किसी के परिवार या मां का अपमान करना कभी भी उचित नहीं हो सकता। उनका मानना है कि मर्यादा और सम्मान की भावना ही समाज को मजबूत बनाती है और यही भारतीय संस्कृति की पहचान भी है।