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Unnao news: 19 साल बाद किसान को मिला न्याय, नहर विभाग, पीडब्ल्यूडी की नीद उड़ी

19 साल पहले नहर विभाग और पीडब्ल्यूडी ने नहर बनाने के साथ पटरी को भी पक्की कर दिया।‌ इसके खिलाफ किसान अदालत की शरण में गया। जहां उसे सफलता मिली।

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Unnao news: 19 साल बाद किसान को मिला न्याय, नहर विभाग, पीडब्ल्यूडी की नीद उड़ी

Unnao news: 19 साल बाद किसान को मिला न्याय, नहर विभाग, पीडब्ल्यूडी की नीद उड़ी

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पीडब्ल्यूडी और नहर विभाग ने खेत के बीच से जबरदस्ती नहर निकालकर पक्की पटरी बना दी। इसके खिलाफ पीड़ित अदालत की शरण में गया। जहां से उसे 19 साल बाद न्याय मिला। लेकिन अदालत के आदेश के बाद भी संबंधित विभाग ने किसान को कब्जा नहीं दिया। दूसरी बार फिर अदालत ने थानाध्यक्ष को कब्जा दिलाने का आदेश दिया है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी अधिशासी अभियंता अभियंता ने कहा कि ग्रामीणों की सहमति पर यह सड़क बनाई गई थी। अदालत के आदेश के खिलाफ अपील की गई है। पीड़ित किसान ने बताया कि बिना किसी मुआवजा के जबरदस्ती उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है। मामला पुरवा तहसील के असोहा विकासखंड का है।

अशोक थाना क्षेत्र के इस्माइलपुर निवासी रामदत्त द्विवेदी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने उनकी जमीन पर जबरदस्ती सड़क बना दी। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने 2016 में कब्जा हटाने का आदेश पीडब्ल्यूडी को दिया था। लेकिन मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। रामदत्त ने बताया कि दोबारा एक बार फिर अदालत ने कब्जा हटाने का आदेश दिया है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपू यादव ने बताया कि अदालत के आदेश पर अमल किया गया तो उन लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होगी। रास्ता अवरोध हो जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से इस समस्या के निराकरण की मांग की।

पीडब्ल्यूडी इंजीनियर एचडी अहिरवार ने बताया कि 2004 में ग्रामीणों की मांग पर नहर निकाल कर पटरी को पक्का कर दिया गया था। इसके खिलाफ राम दत्त द्विवेदी ने मुकदमा मुकदमा लिखवाया था। न्यायालय ने आदेश दिया कि जमीन पर गलत सड़क बना दी गई है। इसे हटाया जाए। जनवरी 2023 में जिला न्यायालय में आदेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी बीच इजरा वाद पर न्यायालय ने कब्जा हटाने का आदेश दोबारा दिया।

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एचडी अहिरवार ने बताया कि जिला प्रशासन अदालत के आदेश का पालन करेगी। अगली तारीख में वादी उपस्थित हुआ तो सारे तथ्य रखे जाएंगे और स्टे लेने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग को निशुल्क जमीन दी थी। लेकिन इसे अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। जिसके कारण लगता है कि गलत कब्जा है। 143 मी नहर की सील्ट भी साफ नहीं की गई है। शेष निर्माण कार्य पर ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं है। मार्ग अवरुद्ध होने से ग्रामीणों को आने जाने में काफी परेशानी होगी।‌


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