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नगर निगम चुनाव से पहले सपा को झटका, कद्दावर मुस्लिम नेता ने इस पार्टी का नहीं छोड़ा साथ

यूपी चुनाव में गठबंधन के तहत लड़ा था चुनाव, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 30 Oct 2017, 5:03 PM IST

कद्दावर मुस्लिम नेता ने इस पार्टी का नहीं छोड़ा साथ

कद्दावर मुस्लिम नेता ने इस पार्टी का नहीं छोड़ा साथ

वाराणसी. नगर निगम से पहले सपा को तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता ने अब कांग्रेस में जाने की तैयारी कर ली है। यूपी चुनाव २०१७ के तहत सपा के पूर्व विधायक ने शहर उत्तरी से गठबधंन प्रत्याशी के तहत चुनाव लड़ा था इसके बाद से पूर्व विधायक ने सपा से दूरी बना ली है।
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पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की आठ विधानसभा सीटों पर बहुत दिलचस्प चुनाव हुआ था। बीजेपी ने सभी आठ सीटों पर चुनाव जीता है। शहर उत्तरी का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण था। इस सीट की सबसे खास बात थी कि यहां पर सपा के पूर्व विधायक को कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ाया गया था। सपा के कद्दावर मुस्लिम नेता अब्दुल समद अंसारी भले ही शहर उत्तरी से चुनाव नहीं जीत पाये थे लेकिन उन्होंने दमदारी से अपना चुनाव लड़ा था। सपा व कांग्रेस के गठबंधन का ही असर था कि सपा के पूर्व विधायक को बकायदे कांग्रेस की सदस्यता दिलाने के बाद ही टिकट दिया गया था उस समय अब्दुल समद अंसारी ने कहा था कि वह गठबंधन के तहत कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वह हमेशा ही समाजवादी ही रहेंगे। चुनाव के बाद से सारी कहानी बदल गयी।
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यूपी चुनाव २०१७ में सपा व कांग्रेस गठबंधन को करारी शिकस्त मिली थी उसके बाद से अब्दुल समद अंसारी ने सपा से दूरी बना ली। सपा के पूर्व विधायक अब्दुल समद अंसारी ने पार्टी की बैठक से किनारा कर लिया और कांग्रेस की ही बैठक में जाने लगे। सपा ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया। स्थिति यह हो गयी कि अब अब्दुल समद अंसारी पूरी तरह कांग्रेस के हो गये हैं, जिसके चलते सपा को नगर निगम चुनाव में तगड़ा झटका लग सकता है।
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कांग्रेस को फायदा तो सपा को होगा नुकसान
बनारस की बात की जाये तो कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेताओं की कमी है, जिनके पास बड़ा वोट बैंक हो। शहर उत्तरी में मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है और अब्दुल समद अंसारी को उनका समर्थन मिलता है। अब्दुल समद अंसारी के कांग्रेस से वापस सपा में नहीं जाने से अखिलेश यादव को नुकसान उठाना पड़ेगा। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की ताकत बढ़ेगी और सपा कमजोर होगी।
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