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वाराणसी ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों की करतूत, स्पाइन ट्यूमर के बजाय की जांघ की सर्जरी, महिला की मौत

आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। यहां ट्रामा सेंटर में एक महिला मरीज की स्पाइन ट्यूमर की सर्जरी के बजाय जांघ की सर्जरी कर दी गई है, जिसके बाद महिला की मौत हो गई...

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फाइल फोटो

वाराणसी: आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। यहां ट्रामा सेंटर में एक महिला मरीज की स्पाइन ट्यूमर की सर्जरी के बजाय जांघ की सर्जरी कर दी गई है, जिसके बाद महिला की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि एक ही नाम की दो महिला थी और एक को स्पिन ट्यूमर की शिकायत थी, जबकि दूसरे के पैर में फ्रैक्चर था। नाम के कंफ्यूजन में डॉक्टर ने यह लापरवाही कर दी।

मृतक महिला के पोते ने की शिकायत

इस मामले में बलिया की मृतक महिला राधिका देवी (71) के पोते मृत्युंजय पाल ने आईएमएस बीएचयू के डायरेक्टर से लिखित शिकायत दर्ज कराई है। मृत्युंजय ने बताया कि उनकी दादी को 25 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिन्हें स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की शिकायत थी। मृत्युंजय ने बताया कि दादी का इलाज डॉ अनुराग साहू की देखरेख में किया जा रहा था।

मृत्युंजय के मुताबिक, 7 मार्च को उनकी दादी को लेकर डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में गए और उनके जांघ की सर्जरी कर दी। सर्जरी के दौरान फ्रैक्चर नहीं मिलने के बाद आनन-फानन में टांके लगाकर उन्हें ओटी से बाहर कर दिया गया। मृत्युंजय ने आरोप लगाया है कि इस बारे में जब डॉक्टर से पूछताछ की गई तो उनके साथ स्टाफ ने दुर्व्यवहार किया और गलत ऑपरेशन के कारण उनकी दादी को मेमोरी लॉस, मुंह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी कई समस्याएं होने लगी।

27 मार्च को हुई मौत

मृत्युंजय का मुताबिक, 18 मार्च को न्यूरो सर्जरी की टीम ने दोबारा उनकी दादी का ऑपरेशन किया और इस दौरान वह अस्पताल में ही भर्ती रहीं। 27 मार्च की सुबह उनकी दादी की कार्डियोपल्मनरी अरेस्ट की वजह से मौत हो गई, जिसकी शिकायत उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति से भी की है।

घटना सामने आने के बाद इस मामले में एक जांच टीम बिठाई गई और बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रोफेसर सौरभ सिंह से मामले में रिपोर्ट मांगी। सूत्रों के मुताबिक, प्रोफेसर सौरभ सिंह की रिपोर्ट में गलत सर्जरी का जिक्र किया गया और बताया गया कि न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट में भर्ती की गई महिला राधिका देवी की उम्र 71 साल थी जबकि ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती की गई एक महिला का नाम भी राधिका सिंह ही था जिनकी उम्र 82 वर्ष थी।

रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

रिपोर्ट में आर्थोपेडिक विभाग की टीम के 7 मार्च के ऑपरेशन का भी जिक्र किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि स्पाइनल ट्यूमर से ग्रसित राधिका देवी की गलत सर्जरी कर दी गई और जांघ में चीरा लगाने के बाद जब फ्रैक्चर नहीं मिला तो सर्जरी को रोक कर महिला को ऑपरेशन थिएटर से बाहर कर दिया गया। दरअसल, मामला सामने आने के बाद बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एमएन शंखवार ने चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी। फिलहाल, पूरी रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में कार्रवाई की बात कही जा रही है।