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इस संसदीय सीट पर जीत के लिए बीजेपी का बड़ा दांव, बसपा को लगा झटका

सपा के कद्दावर नेता के भी, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 16 Oct 2017, 7:49 PM IST

बीजेपी

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वाराणसी. फूलपुर संसदीय सीट पर होने वाला उपचुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्र बन चुका है। देश के आजाद होने के बाद बीजेपी पहली बार इस सीट पर २०१४ में चुनाव जीती थी। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या इस सीट से बीजेपी के पहली बार सांसद चुने गये थे। केशव प्रसाद मौर्या के इस सीट पर इस्तीफा दे देने से यहां पर उपचुनाव होने वाला है। बीजेपी जानती है कि उसे वर्ष २०१४ की तरह जीत मिलने की संभावना कम है इसलिए पार्टी ने बड़ा दांव खेल कर बसपा को तगड़ा झटका दिया है और अब सपा में सेंधमारी करने की तैयारी की जा रही है।
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IMAGE CREDIT: Patrika

यूपी के दो संसदीय सीट पर उपचुनाव होने वाला है। गोरखपुर सीट तो गोरक्षपीठ के महंत के नाम पर रहती है इसलिए सीएम योगी के इस्तीफा दे देने के बाद जो भी बीजेपी की तरफ से चुनाव लड़ता है उसकी जीत के संभावना अधिक रहेगी। फूलपुर संसदीय सीट की कहानी बिल्कुल अलग है। पटेल के बाद सबसे अधिक आबादी ब्राह्मणों की है। इसके बाद मुसलमान का नम्बर आता है। बीजेपी यह बात जानती है इसलिए उसने बसपा व सपा को तगड़ा झटका देने की तैयारी की है। बीजेपी ने इलाहाबाद यमुनापार विधानसभा के पूर्व विधायक दीपक पटेल व उनकी माता केसरी देवी को पार्टी में शामिल कर लिया है। बसपा के ईमानदार माने जाने वाले नवाबगंज के पूर्व विधायक गुरुप्रसाद मौर्या को भी बीजेपी में इंट्री करायी गयी है। समीकरणों की बात करे तो बीजेपी ने बहुत बड़ा दांव खेल दिया है। फूलपुर संसदीय सीट में ही नवाबगंज विधानसभा आती है और यहां पर बसपा के पूर्व विधायक रहे गुरुप्रसाद मौर्य की बड़ी इज्जत है। बेहद ईमानदार माने जाने वाले गुरुप्रसाद मौर्य का पुराना जादू उपचुनाव में चला तो बीजेपी को फायदा हो जायेगा। दीपक पटेल व उनकी माता केसरी देवी को कद्दावर नेता माना जाता है। पटेल वर्ग के अतिरिक्त अन्य पिछड़ा वर्ग में इन नेताओं की अच्छी पकड़ है। बीजेपी अपनी कमजोर कड़ी को इन नेताओं की मदद से दूर करने में जुटी है। बीजेपी का यह दांव कितना काम आता है यह तो समय ही बतायेगा। इतना तो साफ है कि कद्दावर नेताओं के जाने से बसपा को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
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बीजेपी ने बनायी सपा को झटका देने की तैयारी
बीजेपी ने सपा को झटका देने की तैयारी की है। अभी यह अटकले ही लग रही है कि लगातार तीन बार से सांसद रहे धर्मराज पटेल भी बीजेपी में जा सकते हैं। धर्मराज पटेल वही नेता है, जिन्होंने बसपा के संस्थापक कांशीराम को चुनाव में पटखनी दी थी। बीजेपी का दांव अगल चल जाता है तो सपा को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा और उपचुनाव के पहले बीजेपी की स्थिति अच्छी हो जायेगी।
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