सम्मेलन में कवि सुरेन्द्र शर्मा, संपत सरल और महेन्द्र अजबनी ने हास्य के बाण छोड़े, वहीं ममता शर्मा और प्रसिद्ध शायर वसीम बरेलवी की रचनाएं सीधे काव्यप्रेमियों के दिल में उतर गई। महफिल में कवि हास्य की बौछार करते रहे। इस अवसर पर कवियों ने अपने प्रस्तुतियों में साहित्यकारों का पुरस्कार लौटाना, देश की राजनीति, मीडिया, संत-महात्मा जैसे मुद्दों पर भी जमकर कटाक्ष किए।