
गुरु पूर्णिमा 2026: मुस्लिम समाज ने किया गुरु वंदन
Guru Purnima 2026 in Varansi: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी के पातालपुरी मठ में सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी झलक देखने को मिली। यहां 100 से अधिक मुस्लिम श्रद्धालुओं ने जगतगुरु बालक दास महाराज से गुरु दीक्षा ग्रहण की और गुरु पूजा में भाग लिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरु किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे ज्ञान, मार्गदर्शन और जीवन के सही पथ के प्रतीक हैं।
जगतगुरु बालक देवाचार्य जी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का दिन उन शिष्यों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो पूरे वर्ष विभिन्न कारणों से अपने गुरु के पास नहीं पहुंच पाते। इस दिन वे गुरु के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने का अवसर है।
उन्होंने बताया कि पातालपुरी मठ जगतगुरु रामानंद जी महाराज की परंपरा से जुड़ी पीठ है, जिसकी स्थापना जगतगुरु नरहर्यानंद जी महाराज ने की थी। इस पीठ की विशेषता यह है कि यहां किसी भी धर्म, जाति या वर्ग के लोगों के लिए दरवाजे खुले हैं। सभी श्रद्धालु समान भाव से गुरु पूजा करते हैं और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।
जगतगुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि गुरु वह हैं, जो व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि मठ में हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोग भी गुरु मंत्र ग्रहण करते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और आरती में शामिल होते हैं। उनके अनुसार यह परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही समरसता की भावना का प्रतीक है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी को शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहिए और भगवान राम के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अहंकार, द्वेष और भेदभाव से दूर रहकर प्रेम, सद्भाव और गुरु भक्ति को जीवन का हिस्सा बनाने की बात कही।
गुरु पूजा में शामिल अफरोज अहमद ने कहा कि वह हर वर्ष गुरु पूर्णिमा पर मठ पहुंचकर गुरु की आरती और पूजा में शामिल होते हैं। उनके अनुसार जीवन में सही दिशा और ज्ञान प्राप्त करने के लिए हर व्यक्ति को एक गुरु की आवश्यकता होती है, चाहे उसका धर्म या समुदाय कोई भी हो।
उन्होंने बताया कि उनके गुरु डॉ. राजीव श्रीगुरुजी हैं, जो विशाल भारत संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका उद्देश्य समाज में शांति, एकता और जाति-धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है।
अफरोज अहमद ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का संदेश सभी लोगों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर गुरु का सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है। उनका कहना था कि समाज में नफरत की बजाय भाईचारे और आपसी विश्वास को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।
कार्यक्रम में मौजूद जाकिर हुसैन ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से बालक दास महाराज से जुड़े हुए हैं और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि गुरु हमेशा समाज में एकता, समरसता और आपसी सद्भाव का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विविध परंपराओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन देश, संस्कृति और विरासत सभी की साझा है। उनका मानना है कि सामाजिक दूरी कम करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सभी समुदायों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
जाकिर हुसैन ने कहा कि लोग विदेशों की संस्कृति को आसानी से अपनाते हैं, लेकिन अपने देश की परंपराओं को अपनाने में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की मिट्टी, संस्कृति और विरासत सभी को जोड़ती है और इन्हीं मूल्यों के साथ समाज में सौहार्द और शांति को मजबूत किया जा सकता है।
Updated on:
29 Jul 2026 04:07 pm
Published on:
29 Jul 2026 04:07 pm
