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350 साल बाद कश्मीर की लकड़ी से तैयार हुआ बाबा विश्वनाथ का नया रजत सिंहासन

350 सौ साल बाद ये पहला ऐसा मौका है जब बाबा के सिंहासन के लिए लकड़ी, कश्मीर से मंगवा कर बनवाई गई है। अब सोमवार को रंगभरी एकादशी के मौके पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा नए रजत सिंहासन पर निकलेगी।

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350 साल बाद कश्मीर की लकड़ी से तैयार हुआ बाबा विश्वनाथ का नया रजत सिंहासन

350 साल बाद कश्मीर की लकड़ी से तैयार हुआ बाबा विश्वनाथ का नया रजत सिंहासन

काशी में बाबा विश्वनाथ की की चल विग्रह की पालकी यात्रा के लिए नया रजत सिंहासन तैयार हो गया है। इस नये रजत सिंहासन को महंत परिवार ने तैयार करवाया है। शिवांजलि की ओर से शनिवार की शाम बाबा विश्वनाथ को नवनिर्मित रजत सिंहासन अर्पित किया गया। अब इस नये रजत सिंहासन पर श्रीकाशी विश्वनाथ, रंगभरी एकादशी पर गौरा को नए रजत सिंहासन पर विदा कराकर कैलाश ले जाएंगे। आपको बता दें कि 350 सौ साल बाद ये पहला ऐसा मौका है जब बाबा के सिंहासन के लिए लकड़ी, कश्मीर से मंगवा कर बनवाई गई है। अब सोमवार को रंगभरी एकादशी के मौके पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा नए रजत सिंहासन पर निकलेगी।

चिनार और अखरोट की लकड़ी से बना है सिंहासन

दरअसल, दो वर्ष पूर्व विश्वनाथ मंदिर स्थित महंत आवास का हिस्सा कॉरिडोर विस्तारीकरण के दौरान अचानक गिर गया था। जिसके चलते बाबा की रजत पालकी का सिंहासन एवं शिवाला क्षतिग्रस्त हो गया था। रंगभरी एकादशी महोत्सव के लिए गठित ‘शिवांजलि’ के माध्यम से कश्मीर के बाबा भक्त मनीष पंडित ने चिनार और अखरोट की लकड़ी सिंहासन के लिए उपलब्ध कराई।

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कारीगरों ने नहीं लिया सिंहासन को तैयार करने का मेहनताना

काष्ठ शिल्पी शशिधर प्रसाद और अशोक कसेरा नें सिंहासन को तैयार किया लेकिन इसके बदले में उन्होंने कोई मेहनताना नहीं लिया।

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250 सालों से गयास अहमद का परिवार बना रहा बाबा की पगड़ी

बाबा विश्वनाथ, रंगभरी एकादशी के मौके पर हाजी गयास के हाथों तैयार शाही पगड़ी पहनकर तैयार होंगे। आपको बता दें कि श्री काशी विश्वनाथ की शाही पगड़ी ढाई सौ साल से हाजी गयास का परिवार बनाता आ रहा है। हर साल की तरह मखमल के साथ जरी, बूटा, नगीना, फलंगी एवं सुरखाब के पंख से बाबा की पगड़ी बनकर तैयार है।