
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (Pc-Vijendra Mishra)
Padma awarded TK Lehri: वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में करीब 8 महीने से इलाज के लिए भर्ती 85 वर्षीय पद्मश्री प्रोफेसर डॉ टीके लहरी के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। प्रोफेसर लहरी के साथ कार्डियोथैरेसिक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगा है। परिजनों ने इस मामले में बताया है कि आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर ने डॉक्टर लहरी को गाली दी और उनके साथ मारपीट की है। उनके चेहरे और आंख पर चोट लगी है। इस मामले की शिकायत परिजनों ने ईमेल के माध्यम से काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति, आईएमएस के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक से की है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया है। बताया जा रहा है कि मेडिकल बोर्ड के सदस्यों ने मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल के आईसीयू में जाकर प्रोफेसर लहरी से मुलाकात किया है और स्थिति का जायजा लिया है। आईएमएस के डायरेक्टर डॉक्टर एसएन शंखवार ने कहा है कि परिजनों की तरफ से ईमेल प्राप्त होने के बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया और मेडिकल बोर्ड के साथ वह भी मौके पर पहुंचे हुए थे। उन्होंने बताया कि जिस एसोसिएट प्रोफेसर पर आरोप लगा है, वह उनकी सेवा में तैनात हैं और वह डॉक्टर लहरी के शिष्य भी हैं।
उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति की तरफ से ईमेल किया गया था उनको पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है और प्रोफेसर लहरी को देखने के लिए उन्हें अस्पताल भी बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि ईमेल भेजने वाले व्यक्ति 2 सितंबर से अभी तक उन्हें देखने के लिए नहीं पहुंचे हैं। डॉक्टर संखवार ने बताया कि डॉक्टर लहरी के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है, जो लगातार उनके ऊपर निगरानी रखता है। उन्होंने मारपीट किए जाने संबंधित सभी आरोपी को निराधार बताया है। वहीं, परिजनों ने बताया कि परिवार के सभी सदस्य पश्चिम बंगाल के कोलकाता में रहते हैं। परिजनों के मुताबिक, थप्पड़ मारने और दुर्व्यवहार किए जाने की जानकारी विभाग के ही एक डॉक्टर ने उन्हें दी।
बता दें कि प्रोफेसर लहरी चिकित्सा सेवा से सेवानिवृत हो चुके हैं। उनका जन्म 1941 में कोलकाता में हुआ था और 2003 में वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से रिटायरमेंट ले चुके हैं। बताया जा रहा है कि रिटायरमेंट के बाद भी प्रोफेसर लहरी लगातार मरीजों को देखते रहे। सबसे बड़ी बात यह है की उम्र के इस पड़ाव में वह पैदल ही सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक के ओपीडी तक जाते थे और मरीज का इलाज करते थे। मरीजों की सेवा में लगातार योगदान देने के लिए 2006 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। परिजनों की माने तो प्रोफेसर लहरी अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा दान कर देते हैं।
Updated on:
06 Sept 2026 12:01 pm
Published on:
06 Sept 2026 12:01 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
